आतंकियों को फंडिंग करने के आरोपी संजय सरोज का पैतृक मकान रानीगंज के कहला में था। 40 साल पहले पिता व चाचा ने पूरी संपत्ति पट्टीदारों को बैनामा कर दी थी। संजय अपने पैतृक घर लोगों से मिलने-जुलने अक्सर जाता था। शुरू में उसने पेड़ कटवाए, आंवला बेचा। कुछ दिनों तक एटीएम बूथों पर फ्राड किया और फिर टेरर फंडिंग।
नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज निवासी संजय सरोज व उसके दोस्त नीरज मिश्रा को एटीएस ने टेरर फंडिंग के आरोप में रविवार को जेल भेजा था। एटीएस की टीम उसे शनिवार को घर से उठा ले गई थी। उसके साथ चंततपुर के रहने वाले सुधाकर तिवारी और राजापुर औवार के ओमप्रकाश वनवासी को भी टीम ले गई थी। भगेसरा के दूसरे संजय सरोज को भी टीम उठाई थी, लेकिन बाद में उसे छोड़ देने की बात सामने आई है। रविवार को एटीएस के खुलासे के बाद भगेसरा व आसपास के गांवों में सनसनी फैल गई। कल तक संजय सरोज के आगे पीछे घूमने वालों ने भी अपना ठिकाना बदल दिया। संजय के पिता रामखेलावन दो भाई थे। बचपन में ही रामखेलावन के पिता अलगूराम की मौत हो गई।
तब रामखेलावन व उसके भाई रामसजीवन को छोडक़र उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली। हालांकि बाद में दोनों बेटों को भी अपने साथ ले गईं। मुआर अधारगंज में रामसजीवन मां के साथ रहने लगा तो रामखेलावन पंजाब चला गया। जहां वह पटियाला में रेलवे की नौकरी करने लगा। हालांकि अलगू की संपत्ति में दोनों का नाम चढ़ गया। करीब 40 साल पहले दोनों भाइयों ने पट्टीदार अर्जुन सरोज, भुआल के हाथ बेच गांव की सारी संपत्ति बेच दी। रामखेलावन पंजाब से घर आता था तो ससुराल पूरनपुर जोलहापुर में साले वासुदेव के घर रुकता था और अपने पैतृक घर कहला व भाई रामसजीवन के पास जरूर जाता था। पंजाब में सभी रेलवे के आवास में रहते थे।
पैतृक गांव कहला संजय व उसके भाइयों का बराबर आना जाना था। वह अपना पुश्तैनी मकान देखने के बाद बस्ती के लोगों से बातचीत कर समय गुजारा करते थे। बाद में फिर पृथ्वीगंज भगेसरा में हाईवे के किनारे जमीन खरीदकर आलीशान मकान बनवाया। संजय सरोज शुरुआत में आंवले का कारोबार करता था। कुछ दिनों तक लकड़ी का व्यवसाय भी किया। एटीएम बूथों पर फ्राड के मामलों में भी उसका नाम सामने आया। फिर अचानक से उसका रहन-सहन अचानक बदल गया।
तीन साल पहले हुई पिता की मौत
पंजाब से रेलवे की नौकरी से रिटायर होने के बाद संजय का पिता रामखेलावन परिवार के साथ पृथ्वीगंज भगेसरा में आकर रहने लगा। तीन साल पहले रामखेलावन की मौत हो गई। उसकी मा को पिता की पेंशन मिलती है। संजय की बाबत परिवार के लोगों के अलावा आसपास के लोग भी मुंह खोलने से कतरा रहे हैं।
मुर्गा बेचता है बड़ा भाई रमेश
नगर कोतवाली के भगेसरा पृथ्वीगंज निवासी संजय सरोज चार भाई है। बड़ा भाई रमेश सरोज मुर्गा बेचने का कारोबार करता है। संजय से छोटे प्रदीप व कुलदीप कपड़े के साथ ही ट्रेवल्स का काम देखते थे। इस कार्रवाई के बाद घर के पुरुष फरार हैं। संजय की मां व भयाहू ही घर पर हैं। वह भी बाहर नहीं निकल रहीं और न किसी से बातचीत करती हैं। संजय के दो बेटे हैं। पत्नी और बेटे भी घर छोडक़र फरार हैं। हालांकि यह चर्चा जरूर थी कि वह अपने मायके बच्चों को लेकर चली गई है।
कुछ देर के लिए खुली दुकान, फिर हो गई बंद
पृथ्वीगंज भगेसरा निवासी संजय सरोज के मकान में मां व परिवार की महिलाएं हैं। मंगलवार की सुबह कुछ देर के लिए कपड़े की दुकान आधी खुली रही। फिर मां ने दुकान बंद करा दी।
तीन साल से बदल रही थी संजय की जिंदगी
पंजाब से छह साल पहले प्रतापगढ़ आए संजय सरोज की जिंदगी तीन साल पहले बदलने लगी। लग्जरी वाहनों के साथ ही महंगी शराब के शौकीन संजय के पास दो बोलेरो, एक स्कापयो, एक होंडा सिटी, एक महेंद्रा पिकअप, 2 स्विफ्ट डिजायर कार, दो बुलेट, एक बाइक व एक स्कूटी है। हर कोई उसकी तरक्की देखने के बाद इस सोच में जरूर पड़ता कि कपड़े की दुकान व ट्रेवल्स से इतना कुछ नहीं आ सकता, लेकिन उसके शाही खर्च के चक्कर में हर कोई उसके आगे पीछे मंडराता रहता। वह धार्मिक कार्यों में बढ़चढक़र हिस्सा भी लेता था। जरूरत पडने पर लोगों की मदद के लिए भी तैयार रहता था।
तीन दिन बाद बदल देता था मोबाइल और सिम
टेरर फंडिंग में फंसे संजय सरोज के करीबियों की मानें तो वह अपनी तस्वीर कैमरे में कैद होने से बचाता था। अक्सर तीसरे दिन उसके हाथ में नया मोबाइल सेट होता था। पुराना मोबाइल व नंबर अक्सर बदल दिया करता था। एक मोबाइल नंबर वह बराबर प्रयोग करता था, लेकिन वह हमेशा घर पर ही रहता था।
एसटीएस ने पूछताछ के बाद सुधाकर को छोड़ा, परीक्षा देने गया
नगर कोतवाली के चंपतपुर निवासी सुधाकर तिवारी पुत्र रामकृपाल तिवारी को भी एटीएस की टीम उठा ले गई थी। इसके अलावा राजापुर औवार का रहने वाला ओमप्रकाश को भी टीम अपने साथ पूछताछ के लिए ले गई थी। दोनों से एटीएस की टीमें बराबर पूछताछ करती रहीं। सोमवार को एटीएस मुख्यालय से परिजनों के पास फोन आया। जिसके बाद रिश्तेदार लेने के लिए लखनऊ गए। जहां टीम ने सुधाकर को रिश्तेदारों के हवाले कर दिया। मंगलवार की सुबह वह घर पहुंचा। इस बात की खबर मिलते ही आसपास के लोग एकत्र होने लगे, लेकिन सुधाकर रिश्तेदार के साथ बीए की परीक्षा देने के लिए निकल गया। दिन भर वह घर नहीं लौटा। जबकि ओमप्रकाश अभी तक घर नहीं आया है। जिससे परिवार के लोग काफी परेशान हैं।
हैरत में हैं कहला और ननिहाल पूरनपुर के लोग
टेरर फंडिंग में पकड़े गए संजय सरोज के ननिहाल व पैतृक गांव कहला के लोग हैरत में हैं। लोगों को संजय के गलत काम की भनक तक नहीं थी। आतंकियों की मदद करने के आरोप में पकड़े संजय के ननिहाल व पैतृक गांव के लोगों को यकीन नहीं पड़ रहा। वे दबी जुबान से कहते हैं कि संजय ऐसा कर नहीं सकता। जबकि परिवार के लोग कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
पूर्व एएसपी का नोच लिया था बिल्ला
आतंकियों को फंडिंग करने के आरोप में पकड़े गए संजय सरोज ने पांच साल पहले हुए विवाद में तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक का बिल्ला नोच लिया था। मारपीट करने वालों पर कार्रवाई की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जाम लगाया था। पुलिस दबाव बनाकर जाम हटाना चाहती थी। जिसे लेकर ग्रामीणों व पुलिस के बीच टकराव हो गया था।
नगर कोतवाली के पृथ्वीगंज भगेसरा में वर्ष 2012 में दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। जिसमे दलित बस्ती पर हमलावरों ने कहर ढाया था। इसे लेकश् ग्रामीणों ने हाईवे जाम कर दिया। सूचना पर भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक विसर्जन सिंह यादव मौके पर पहुंचे। वे उग्र ग्रामीणों पर दबाव बनाकर जाम खुलवाने का प्रयास करने लगे। इस दौरान ग्रामीण पुलिस से भिड़ गए। लोगों की मानें तो संजय सरोज ने एएसपी का बिल्ला नोच लिया था। पुलिस ने उसे दबोच लिया लेकिन महिलाओं के आगे पुलिस के कदम पीछे हट गए और संजय उनके चंगुल से निकलकर भाग निकला था। संजय के उकसाने पर ही पुलिस से ग्रामीण भिडने को तैयार हो गए थे। इस घटना के बाद संजय का समाज के लोगों में रुतबा बढ़ गया। वे उसके आगे पीछे चलने लगे। बाजार के दूसरे लोगों की मजाल संजय के साथ रहने वालों लोगों से विवाद की नहीं पड़ती थी।