कोटेदार की मौत से गुस्साए लोगों के हमले से गांव के शंकरदास व शिवदास का परिवार घर के अंदर घंटों कैद रहा। उपद्रवियों ने दोनों के घरों में आग लगा दी। इधर ग्रामीण भी घरों पर लगातार पत्थर व ईंटें उछाल रहे थे। आगजनी तथा पत्थरबाजी से दोनों परिवारों के सदस्यों तथा महिलाओं व बच्चों की जान करीब दो घंटे तक सांसत में फंसी रही। घर की ऊपरी मंजिल पर कैद परिवार के सदस्य बचाव के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन मदद करने वाला कोई नहीं था। आसपास के घरों के लोग दुबक गए।
बवालियों ने इस तरह से दोनों मकानों को घेर लिया था कि खाकी भी अपने को बेबस पा रही थी। प्रधान और उसके घरवाले अपनी जान आफत में पड़ी देखकर अफसरों से लगातार मदद की गुहार लगाते रहे। आगजनी में दोनों घरों के कीमती सामान जलकर नष्ट हो गया। जब पुलिस ने स्थिति नियंत्रिण से बाहर होते देखी तो फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के कई रांउड लगातार फायर करने के बाद बवाल कर रहे लोग ग्रामीण पीछे हटे। तब कहीं जाकर आननफानन में अफसरों ने फायर ब्रिगेड की टीम की मदद से परिवार के सदस्यों घर से बाहर निकाला। धू-धू कर जल रहे मकान से बाहर आने के बाद भी प्रधान के घरवाले घंटो दहशत में रहे।