कोटेदार की मौत के बाद शुरू हुआ तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा था। इस बीच अपर पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह मौके पर पहुंचे। एएसपी ने जब आगजनी व पत्थरबाजी का हाल देखा तो उन्होंने पुलिसकर्मियाें को हालात पर काबू पाने के लिए ललकारा। खाकी एएसपी के निर्देश मिलने के बावजूद अपने बचाव में बार-बार बैकफुट हो रही थी। वहीं प्रधान के मकान में लगी आग भयावह हो उठी थी। ऊपरी मंजिल पर फंसी महिलाएं और बच्चों के साथ प्रधान के घरवाले बचाव के लिए जोर-जोर से चिल्ला रहे थे। भीड़ ने पूरा मकान घेर रखा था। बवाली पुलिस पर लगातार पत्थरबाजी कर रहे थे। इससे पुलिसकर्मियों की आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हो पा रही थी।
मकान में फंसे लोगों को बचाने के लिए एएसपी दिनेश सिंह अपनी जान की परवाह न करते हुए भीड़ में घुस गए और अपनी सर्विस रिवाल्वर से हवाई फायरिंग शुरू की। इसके बाद भी उपद्रवी नहीं हटे तो उन्होंने अपने गनर की एके सैंतालिस थामी और जाबांजी के साथ उपद्रवियों को ललकारते हुए दौड़ाया। एएसपी के साहसिक प्रयास का असर यह हुआ कि सहमे पुलिसकर्मी भी जोश में आ गए और उपद्रवियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। एएसपी के साथ पुलिस बल की फायरिंग से भीड़ छंटने लगी। बवाली इधर-उधर भागने लगे। पुलिस ने उपद्रवयिों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। फायरिंग के बीच किसी तरह फायर ब्रिगेड की टीम के साथ एएसपी ने मकान में फंसे प्रधान के परिजनों को पुलिस वाहन से सुरक्षित बाहर भेजवाया। ग्रामीणों में अपर पुलिस अधीक्षक के साहस की चर्चा देर रात तक होती रही। लोग कह रहे थे कि अपर पुलिस अधीक्षक के आने के पहले जिस तरह पुलिस पीछे हट रही थी उससे यह लगने लगा था कि प्रधान के घरवाले आग में जल जाएंगे।