वोटर कार्ड बनाने के लिए अब कार्यालय के बाहर लोगों से धनउगाही होने लगी है। अधिकारियों की उदासीनता के चलते फ्रेंचाइजी कर्मी की मनमानी पर लगाम नही लग पा रही है। कार्रवाई नही होने से उसका हौसला बढ़ गया है। गरीबों से दौ सौ रुपये लेकर चंद मिनट में मतदाता पहचान पत्र बनाने का गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
लालगंज तहसील में एक निजी कंपनी के पास निर्वाचन कार्ड से संबंधित कार्य का टेन्डर है। उसने इलाके के एक युवक को फ्रेंचाइजी दे रखी है। फ्रेंचाइजी में तैनात कर्मचारी निर्वाचन आयोग के साथ शासन के आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं। तहसील में उपजिलाधिकारी, तहसीलदार व नायब तहसीलदार की नाक के नीचे यहां वोटरकार्ड बनाने के नाम पर धनउगाही हो रही है। दो सौ रूपए लेकर चंद मिनट में नया मतदाता पहचान पत्र बनाने का गोरखा धंधा फल फूल रहा है। फ्रेंचाइजी कर्मियों ने नियमों को ताक पर रखते हुए खुले आम धनउगाही कर रहे हैं।
दो दिन पहले अमर उजाला ने प्रमुखता से दौ सौ रुपये दो और घंटे भर में मतदाता पहचान पत्र लो नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसका असर देखने को मिला और तहसील में खुले कार्यालय में अब धनउगाही पर लगाम लग गया है। लेकिन गरीबों से पैसा लेने का खेल जारी है। बस थोड़ा सा तरीका बदल दिया गया है। फ्रेंचाइजी कर्मी कार्यालय में पैसा लेने के बजाए बाहर निकलकर वसूली करते हैं और कार्ड बनाकर उन्हे बाहर ही उपलब्ध करा देते हैं।