यूपी बोर्ड में फर्जीवाडे़ पर लगाम कसते ही इस वर्ष छात्र-छात्राओं की संख्या 25,345 कम हो गई है। अभी तक दो-दो कॉलेजों से फार्म भरने वाले शिक्षा माफिया की इस बार दाल नहीं गलने से वास्तविकता सामने आ गई है। इधर, वर्षों से परीक्षा केंद्र बनने वाले 36 कॉलेजों को करारा झटका लगा है, दस-दस साल से परीक्षा केंद्र बनने वाले कॉलेजों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है, जबकि 23 नए कॉलेजों को केंद्र बनाया गया है।
यूपी बोर्ड में फर्जी आवेदन पर ब्रेक लगते ही माध्यमिक शिक्षा विभाग में परीक्षार्थियों की संख्या घट गई है। चालू शिक्षासत्र में कुल 1,14,344 परीक्षार्थियों ने आवेदन किया है। इसमें हाईस्कूल में 77,725 और इंटरमीडिएट में 63,619 परीक्षार्थी शामिल हैं। जबकि बीते शिक्षासत्र में 1,66,689 परीक्षार्थियों ने आवेदन किया था। इसमें हाईस्कूल में 88,061 और इंटरमीडिएट में 78,628 छात्र-छात्राएं थे। बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष 25,345 परीक्षार्थी कम शामिल होंगे। यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षार्थियों की आई यह कमी ऑनलाइन फार्म भरने की प्रक्रिया से हुई है। इस वर्ष बोर्ड ने ऐसी वेबसाइट विकसित की थी कि कक्षा बारह में पढ़ने वाले वही बच्चे अपना फार्म भर सकते थे, जिनका कक्षा ग्यारह में रजिस्ट्रेशन हुआ था। बोर्ड की कड़ाई से कोई भी छात्र न तो दो कॉलेज से फार्म भर पाया और न ही कोई बाहरी आवेदन करने पाया। इसका परिणाम यह रहा कि इस वर्ष परीक्षार्थियों की संख्या में भारी कमी आ गई है।
36 इंटर कॉलेजों को लगा झटका, नहीं बने केंद्र
बोर्ड परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में जिले 36 उन कॉलेजों को इस वर्ष केंद्र नहीं बनाया गया है, जो पिछले दस साल से लगातार केंद्र बन रहे थे। यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए जिले में 332 कॉलेजों को केंद्र बनाया गया है। पिछले वर्ष परीक्षा केंद्रों की संख्या 368 थी। इस वर्ष 23 नए कॉलेजों को भी परीक्षा केंद्र बनाया गया है। डीआईओएस डॉ. ब्रजेश मिश्र ने बताया कि ऑनलाइन फार्म भरने में कोई गड़बड़ी नहीं होेने से इस वर्ष परीक्षार्थियों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने बताया कि जब परीक्षार्थियों की संख्या घटी है, तो केंद्रों की संख्या कम होना स्वाभाविक है।