बिना हेलमेट बाइक लेकर फर्राटा भरने में स्कूली बच्चे सबसे आगे हैं। 13 से 17 साल की कच्ची उम्र में वे न सिर्फ बाइक लेकर स्टंट करते नजर आते हैं, बल्कि भीड़भाड़ वाले इलाके में ट्रिपलिंग कर रेस भी लगाते हैं। शहर के कई नामीगिरामी स्कूलों में छुट्टी के बाद हर दिन यहां हुड़दंग होता है। बाइक पर ट्रिपलिंग और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में कई बच्चे घायल भी हो चुके हैं। भीड़भाड़ वाले इलाके में बाइक रेसिंग के दौरान न सिर्फ उनकी जान को खतरा रहता है, बल्कि सड़क पर चलने वालों की भी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। उनकी स्पीड लोग देखते ही रह जाते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से किसी के पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही हेलमेट, लेकिन पुलिस कभी उन्हें रोकने-टोकने का प्रयास नहीं करती है। छुट्टी के समय स्कूलों के पास पुलिस तैनात करने का दावा तो किया जाता है, लेकिन इस तरफ कभी ध्यान नहीं दिया जाता।
शहर के कई कान्वेंट और पब्लिक स्कूलों में दसवीं और बारहवीं की कक्षा में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों की बड़ी संख्या है जो प्रतिदिन बाइक से ही विद्यालय आते हैं। उनके पास महंगी से महंगी बाइक होती है। स्कूलों में छुट्टी होने के बाद शहर के अंबेडकर चौराहे, मीराभवन, कटरारोड, विकास भवन, फुलवरिया, राजापाल टंकी, सदर चौराहे जैसे भरे बाजारों में इन छात्रों के बीच बाइक रेसिंग शुरू हो जाती है। हर दिन दोपहर एक से डेढ़ के करीब यह नजारा आम होता है। उनकी बाइक की स्पीड देखकर लोग सांसें थाम लेते हैं। जिला अस्पताल में बीते एक महीने में सड़क दुर्घटनाओं में बीस स्कूली छात्र बाइक चलाते समय गिरकर घायल होने के बाद पहुंचे। चिकित्सकों ने उनकी बाइक से घायल 30 से अधिक लोगों का भी इलाज किया। ग्रामीण इलाकों में भी कुछ यही हालात हैं।
बिना हेलमेट के आपसी प्रतिस्पर्धा में बाइक से वे न सिर्फ खतरनाक खेल खेल रहे हैं, बल्कि दूसरों की जान भी आफत में डाल रहे हैं। 14 से 16 साल की उम्र में घरवाले भी उन्हें महंगी बाइक खरीदकर दे दे रहे हैं। पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कभी कार्रवाई नहीं करती। जबकि शासन का निर्देश है कि तेज रफ्तार, एक बाइक पर सवार तीन लोगों के साथ ही बगैर हेलमेट पकड़े जाने पर चालान किया जाए। या फिर जुर्माना वसूला जाए।
धौंस और रसूखदार परिवार से होने के कारण नहीं टोकती पुलिस
सड़कों पर ट्रिपिलंग कर तेज रफ्तार में फर्राटा भरने वाले ज्यादातर छात्र रसूखदार परिवारों से होते हैं। अगर पुलिस वाले कभी उन्हें रोकते भी हैं तो तुरंत किसी बड़े अधिकारी या फिर नेता का फोन उनके पास आ जाता है। और तो और पकड़े जाने पर छात्र भी धौंस जमाने लगाते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मी इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते। पुलिस की मानी जाए तो चेकिंग के दौरान बाइक रोकने पर जुर्माना लिया जाता है तो स्कूली बच्चों के परिजन तत्काल जुर्माना जमा करके बाइक को छुड़वा लेते हैं और उन्हें फटकार भी नहीं लगाते हैं।
70 से 80 की स्पीड में चलते हैं स्कूली छात्र
घर से स्कूल या फिर छुट्टी के बाद घर लौटते समय स्कूली बच्चों की बाइक की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा के करीब होती है। इतनी तेज रफ्तार में सामने कोई आ जाता है तो उसे बचा पाना इन छात्रों के लिए टेढ़ी खीर हो जाता है। अचानक ब्रेक लगाने पर वे बाइक लेकर पलट भी जाते हैं और उन्हें गंभीर चोटें आ जाती हैं।
सोमवार को चिलबिला इलाके में अभियान चलाकर बगैर हेलमेट और कागजात के चलने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मंगलवार से स्कूली बच्चों पर ध्यान दिया जाएगा। बगैर हेलमेट या फिर बगैर डीएल के पकड़े जाने पर चालान काटा जाएगा।
संतोष कुमार, टीएसआई।