जेल में आए दिन हो रहे बवाल को देखते हुए शासन ने कारागार के बाहर पीएसी तैनात करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद पहले तो बंदियों को कुछ दिन परेशान होना पड़ा। दिन में मिलने वाली बंदियों की सुविधाएं बंद हो गई, लेकिन शाम को पीएसी के हटते ही बंदियों तक सारी सुविधाएं पहुंचने लगती है। इसके एवज में बंदीरक्षक बंदियों से मेहनताना भी वसूलते हैं।
जिला कारागार हमेशा सुर्ख्यों में रहता है। चाहे वह बंदियों के बीच मारपीट का मामला हो या फिर जेल के भीतर प्रतिबंधित सामग्री बरामद होने का। जेल मेें निरीक्षण के दौरान प्रतिबंधित सामग्री मिलने व जेल प्रशासन की कारगुजारी की शिकायत अधिकारी बराबर शासन से करते रहते हैं। हाल ही में हुई घटनाओें को देखते हुए रिपोर्ट मिलने पर उच्च अधिकारियोें के आदेश पर जेल गेट पर पीएसी तैनात कर दी गई। जो दिनभर आने-जाने वाले लोगों पर निगाह रखने के साथ ही मुलाकात करने वालों के सामानों की जांच पड़ताल भी करती है। खास बात यह है कि शाम को पीएसी हटा ली जाती है।
सूत्रों की की मानें तो पीएसी के हटते ही बंदियों को प्रतिबंधित सामग्री जेल के भीतर भेजने के लिए उनके करीबी मंडराने लगते हैं। जेल के भीतर से बंदी भी बंदीरक्षकों पर बराबर दबाव बनाते रहते हैं। अंधेरे में छोटे गेट के रास्ते प्रतिबंधित सामग्री बंदियों तक पहुंचाई जाती है। इसके एवज में बंदीरक्षक की जेब गर्म होती है। यह कोई एक दिन की बात नहीं है। अंधेरा होते ही हर दिन बंदियों को प्रतिबंधित सामग्री भेजने वालों का तांता लग जाता है। प्रतिबंधित सामग्री जेल के भीतर पहुंचने के बाद बंदियों की महफिल सजती है। जिस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।