एसबीआई बैंक के सामने 20 लाख रुपये कैश लूटने के प्रयास में हुई गार्ड की हत्या के मामले में बुधवार रात ही डीआईजी जांच के लिए पहुंचे। गुरुवार सुबह आईजी ने भी मौके पर पहुंचकर छानबीन की। पुलिस ने कैशियर विजय की तहरीर पर दो अज्ञात के विरुद्ध हत्या और लूट के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज की है।
नवाबगंज थाना क्षेत्र के परियावां बाजार स्थित स्टेट बैंक के सामने बुधवार शाम वैन से कैश उतारने के दौरान लूट के चक्कर में दो बदमाशों ने गार्ड विनय शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी थी। बदमाशों ने गार्ड की बंदूक से गाड़ी में रखे कैशबाक्स को खोलने के लिए ताले पर फायर किया था, लेकिन गोली के निशान बाक्स पर मिले हैं। लूट में असफल बदमाश भागते समय गार्ड की दोनाली बंदूक भी लूट ले गए। घटना की सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई और रात से ही दबिश शुरू हो गई। आधी रात को डीआईजी विजय यादव पहुंचे और बैंक पहुंचकर जांच की। रात में ही कई पुलिस टीमों का गठन हो गया और उन्हें बदमाशों को खोजने के लिए लगा दिया गया। दूसरे दिन गुरुवार को दोपहर में आईजी केएस प्रताप भी पहुंचे। उनके आने की सूचना पर एसपी, एडिशनल एसपी सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। घटना में अजय की तहरीर पर अज्ञात बदमाशों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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बैंक के डीजीएम और एजीएम भी आए
परियांवा। परियावां बैंक में गार्ड की मौत के बाद दूसरे दिन बैंक के डीजीएम आईएस सिद्दीकी और एजीएम विद्यारमन भी एनटीपीसी गार्ड के शव को देखते हुए परियावां पहुंचे। इस दौरान कैशियर विजय से बात की। इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उधर सेक्योरिटी के कमांडर राणा भी बैंक पहुंचे और गार्ड के बारे में जानकारी ली। हालांकि पूरे दिन बैंक में आम लोगों के लिए कोई काम नहीं हुआ। दिन भर पुलिस और बैंक के अधिकारी ही बैंक में रहे। पूछताछ के साथ ही बार-बार घटनाक्रम की ही जानकारी दी और ली जा रही थी।
बैंक का नहीं बजा सायरन, चेकिंग भी नहीं लगाई गई
घटना के वक्त न तो बैंक का सायरन बजा और न ही पुलिस ने सक्रियता दिखाई। यह लापरवाही लोगों को खल रही है। गार्ड की मौत के बाद इतनी भीड़-भाड के बाद आसानी से बदमाशों का निकल जाना लोगों के गले के नीचे नहीं उतर रहा है।
परियावां एसबीआई में घटना के समय सायरन ही नहीं बजा। ऐसी गंभीर घटनाओं के होने पर बैंक का सायरन बजता है। इससे आसपास के लोगों के साथ ही पुलिस भी सतर्क होती है। यही नहीं ऐसे समय में पुलिस और तेजी से कार्रवाई कर सकती है। उधर पुलिस ने जानकारी होने के बाद चेकिंग जैसी व्यवस्था बनाने के बारे में नहीं सोचा। अगर रायबरेली की तरफ और नवाबगंज थाने की पुलिस हाइवे पर चेकिंग लगाती तो उन्हें पकड़ा जा सकता था। इसका कारण था कि गार्ड को गोली मारने के चक्कर में हेलमेट पहने बदमाश के कपडे में ज्यादा मात्रा में खून लग गया था। यही नहीं वह बाइक से भागे नहीं एकदम आराम से निकले। उनकी कार्यशैली को देखकर लगता था उन्हें इसका अनुभव है। यानी वह बाहर के प्रोफेसनल भी हो सकते हैं। फिलहाल साथ में गई बंदूक मिलने की चर्चाएं भी हैं लेकिन पुलिस अभी इससे इंकार कर रही थी। फिलहाल पुलिस रात से ही काम में लग गई है। बाहर के साथ ही लोकल अपराधियों को भी राडार पर रखकर चेक किया जा रहा है। इसके लिए मानिकपुर, नवाबगंज के साथ ही कुंडा और हथिगवां भी लगे हुए हैं।
शातिर बऊआ और उमेश पर शक
परियावां स्टेट बैंक के सामने कैश लूटने की कोशिश और गोली मारकर गार्ड की हत्या करने के मामले में पुलिस मानिकपुर थाने के शातिर बदमाश बऊवा व उमेश का हाथ मान रही है। दोनों की तलाश में रातभर दबिश दी जाती रही। डीआईजी, एडिशनल एसपी और सीओ रातभर टीमों की मानीटरिंग करते रहे।
बैंक में हुई घटना को देखते हुए पुलिस दुस्साहसी अपराधियों पर फोकस कर रही है। इस घटना में भी पुलिस को सूत्रों के माध्यम से कुछ नाम पता चले हैं। इसमें सबसे बड़ा नाम बऊवा और उमेश का आया है। यह दोनों मानिकपुर थाने पर हमले में शामिल थे। बऊआ तो अभी हाल ही में जेल से जमानत पर छूटा है। वह बेहद शातिर है। नवाबगंज थाने में तत्कालीन एसओ रहे प्रमेंद्र सिंह के आवास से उसने टीवी, कूलर और बाइक गायब कर दी थी। बाद में इसकी जानकारी होने पर उसने सामान लौटाया था। यही नहीं तत्कालीन एसओ प्रमेंद्र सिंह मानिकपुर थाने में पोस्ट हुए तो वहां भी उसकी सक्रियता रही थी। एसओ ने उसके कार्यों को देखते हुए उसे पकडक़र हवालात में डाला था, लेकिन बाद में किसी की सिफारिश पर उसे छोड़ दिया था। बाद में कहासुनी और फिर मानिकपुर थाने पर हमला हुआ। जिसमें गार्ड की गोली लगने से मौत हो गई। ऐसे में पुलिस प्रथम दृष्टया बऊआ और उमेश को ही इस घटना का सूत्रधार मान रही है। उधर इंस्पेक्टर नवाबगंज प्रदीप कुमार प्रतापगढ़, रायबरेली और इलाहाबाद से हाल ही में छूटे अपराधियों का ब्यौरा इकट्ठा कर रहे हैं। वह रात में रायबरेली भी गए थे।