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घोटोले के आरोपी ठेकेदार ने लटकाए अस्पताल

Wed, 25 Apr 2018 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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 मरीजों की सहूलियत के लिए सपा सरकार में कई अस्पतालों के साथ ही ट्रामा सेंटर के निर्माण को हरी झंडी मिली। जिसके लिए आवास विकास परिषद को निर्माण कराने की जिम्मेदारी मिली। आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने जिले के अस्पतालों व ट्रामा सेंटर का निर्माण ऐसे ठेकेदार को सौंप दिया, जिसके ऊपर हाल ही में लाखों के घोटाले का मुकदमा कोतवाली नगर में दर्ज हुआ है। समय सीमा पूरा होने के बाद भी भवन निर्माण अध्ूारा पड़ा है। जिसके कारण मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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महिला अस्पताल में दो तीन प्रसूताओं को एक बेड पर ही जगह मिलती है। इस समस्या को देखते हुए सपा सरकार में महिला अस्पताल के बगल महिलाओं के लिए 100 बेड के अस्पताल के निर्माण को हरी झंडी मिली। जिसे 22 करोड़ की लागत से तैयार किया जाना था। दिसंबर 2015 में प्रारंभ होकर फरवरी 2017 तक इसे बन जाना था, मगर कार्यदायी संस्था के चहेते ठेकेदार देशराज सिंह अभी तक अस्पताल भवन का निर्माण पूरा नहीं करा सके। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो 95 फीसदी भुगतान कार्यदायी संस्था को हो गया है।

इसी तरह पूरे केशवराय में बनने वाले ट्रामा सेंटर का भी यही हाल है। इसके निर्माण के लिए अप्रैल 2016 में हरी झंडी मिली। इसे हर हाल में फरवरी 2017 में पूरा हो जाना था, लेकिन अभी तक निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसके अलावा छितपालगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी फरवरी 2016 में ही विभाग को हैंडओवर करना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके अलावा सुवंसा में 50 बेड के अस्पताल भवन का निर्माण भी अधर में लटका हुआ है। इस अस्पताल को फरवरी वर्ष 2018 में विभाग को सौंप दिया जाना था।
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शिवसत में लगभग 26 करोड़ की लागत से अस्पताल बनाया जा रहा है। अभी नींव का कार्य चल रहा है। विभाग ने लगभग 3.30 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। 52 लाख रुपये ठेकेदार को भी दिए जा चुके हैं। फिलहाल आवास विकास परिषद ऐसे ठेकेदार पर मेहरबान रहा, जिसके ऊपर जिलाधिकारी शंभु कुमार ने पूरे रायजे में पेयजल टंकी निर्माण में घोटाला देखने के बाद मुकदमा दर्ज कराया है। खास बात यह है कि अधिकारियों के आदेश के बाद भी विभागीय अधिकारी ठेकेदार को नोटिस भी नहीं जारी करते।

संडवाचंद्रिका ब्लाक में करोड़ों के गबन का उठा था मामला
संडवाचंद्रिका ब्लाक प्रमुख भले ही रामकली हैं, लेकिन उनका कामकाज कोई और ही देखता है। प्रमुख बनने के बाद ही करोड़ों रुपये के काम कागजों पर हो गए। शिकायतों के बाद शासन से गठित टीएसी जांच हुई। टीम को जांच मेंड भारी अथनियमितता मिली थी। चर्चाओं पर यकीन करें तो घोटाले का आरोपी ठेकेदार ब्लाक प्रमुख का कामकाज देखता है।

डीएम की सख्ती भील् दिख रही बेअसर
जिलाधिकारी शंभु कुमार ने अस्पतालों के निर्माण में विलंब देख आवास विकास परिषद के अधिकारियों को गत दिनों तलब किया था। डीएम ने अफसरों को चेतावनी देते हुए भवन निर्माण पूरा न करने वाले ठेकेदार पर शिकंजा कसने का फरमान सुनाया था, लेकिन आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने चहेते ठेकेदार पर अपना आशीर्वाद बरकरार रखा। जिसके चलते अभी भी निर्माण कार्यों में तेजी नहीं आ हसकी।
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