शादी के बाद पहली बेटी का जन्म हुआ तो सब ठीकठाक रहा, लेकिन जुड़वा बेटियों के पैदा होने के बाद लक्ष्मी व्यथित रहने लगी। ग्रामीणों की मानें तो वह चिंतित जरूर रहती थी, लेकिन इतना बड़ा कदम उठा लेगी यह किसी ने सोचा नहीं था। सुनील मजदूरी कर परिवार का किसी तरह गुजर बसर करता है। परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं है। इस बार लक्ष्मी गर्भवती हुई तो डाक्टरों ने उसके पेट में दो बच्चे पलने की जानकारी दी। वह बेहद खुश थी। ग्रामीणों की मानें तो उसे बेटे की ख्वाहिश थी।
लोगों से बातों के दौरान भी वह बराबर कहती। तेरह दिन पहले जुड़वा बेटियों का जन्म होने पर लक्ष्मी को जैसे सांप सूंघ गया। वह हमेशा अपने आप में खोई रहती थी। बेटा पैदा न होने पर वह काफी व्यथित रहती थी। परिवार के लोगों से बातचीत के दौरान भी वह इस बात की चर्चा करती रहती। हालांकि तालाब से बच्ची का शव निकालने के बाद परिजनों व ग्रामीणों ने उसे फटकारते हुए धमकाया। तब उसने अपनी करतूत बयां की। यह सुन लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। वह यही बताती रही कि बेटियों की परवरिश कैसे होती। ग्रामीणों की मानें तो वह बेटा न होने पर काफी विचलित हो गई और बेटी को बोझ समझते हुए उसने इतना बड़ा कदम उठाया।