प्रतापगढ़। रायबरेली के भदोखर थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह बेकाबू कार ने प्रतापगढ़ जिला कारागार के डिप्टी जेलर वीरेंद्र शर्मा को रौंद दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब डिप्टी जेलर अपनी बुलेट से लखनऊ जा रहे थे। साइकिल सवार को बचाने के चक्कर में वह कार की चपेट में आ गए। हादसे में डिप्टी जेलर की बुलेट और मोबाइल क्षतिग्रस्त हो गया है। हादसे में साइकिल सवार युवक को भी चोटें आईं हैं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने कार को कब्जे में ले लिया है। कार वाराणसी की बताई जा रही है। कार चला रहे आजमगढ़ निवासी कार चालक राम आसरे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। आनन-फानन में बंदीरक्षकों संग दूसरे डिप्टी जेलर को घटनास्थल भेजा गया। हादसे की खबर मिलने पर जेल में माहौल गमगीन हो गया।
जिला कारागार में तैनात डिप्टी जेलर वीरेंद्र प्रकाश शर्मा (38) अपने निजी कार्य से 18 सितंबर का अवकाश लेकर बुलेट मोटरसाइकिल से लखनऊ गए थे। बुधवार की सुबह वह अपनी बुलेट से ड्यूटी पर लौट रहे थे। रायबरेली जनपद के भदोखर में कार्पोरेशन बैंक के सामने तेज रफ्तार फार्च्यूनर कार ने बुलेट में टक्कर मार दी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों की मदद से उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर जिला कारागार पहुंची तो सन्नाटा पसर गया। आनन-फानन में दूसरे डिप्टी जेलर सुनील द्विवेदी को बंदीरक्षकों के साथ घटनास्थल पर भेजा गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मृत डिप्टी जेलर के परिवार के लोग भी रोते बिलखते रायबरेली पहुंचे। मूलत: बरेली जनपद के रहने वाले डिप्टी जेलर वीरेंद्र शर्मा सितंबर 2017 में जनपद कारागार में तैनाती पर कार्यभार ग्रहण किए थे।
जिला कारागार में तैनात डिप्टी जेलर वीरेंद्र शर्मा अपने सरकारी आवास पर अकेले रहते थे। जेल अधीक्षक वीके चौधरी की मानें तो वह अभी तक शादी नही किए थे। पिता भी दुनिया में नही है। तीन बहनों के बीच वीरेंद्र अकेले भाई थे, जो मां के साथ बरेली में पैतृक घर पर रहतीं हैं।
जिला कारागार में डिप्टी जेलर के पद पर तैनात वीरेंद्र प्रकाश शर्मा सरल व मिलनसार स्वभाव के थे। एक साल की तैनाती में अपने कार्यों व स्वभाव के कारण उन्होंने जेल में निरुद्ध शातिर बंदियों के साथ ही आम बंदियों के दिल में जगह बना ली थी। उनके व्यवहार का हर कोई कायल था। अपने काम से काम रखने वाले डिप्टी जेलर ड्यूटी के बाद अपने सरकारी आवास में ही अधिकांश समय व्यतीत करते थे। बंदियों को समझाते हुए जिंदगी बेहतर बनाने के लिए कहते। उनकी हादसे में मौत की खबर मिलते ही हर बंदी से लेकर बंदीरक्षकों के आंखों में आंसू निकलने लगा।