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डिप्टी कमिश्नर ने की पूर्व बीडीसी सदस्य की हत्या

Sun, 30 Aug 2015 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़। सारडीह गांव में शनिवार को वाराणसी में तैनात आबकारी के डिप्टी कमिश्नर ने पूर्व बीडीसी सदस्य की लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद दौड़े लोगों को धमकाते हुए वह अपने को लेकर भाग निकला। घटना से सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने डिप्टी कमिश्नर की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें रवाना कीं। तनाव को देखते हुए गांव में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।
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सारडीह गांव निवासी डिप्टी कमिश्नर जंब बहादुर और पट्टीदार फतेह बहादुर के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। शुक्रवार को उसकी पत्नी और भाई जीत बहादुर की पत्नी को फतेहबहादुर के भतीजे अंकित सिंह व महिलाओं ने मारा था। इस बात की खबर मिलने के बाद डिप्टी कमिश्नर का खून खौल उठा था। वह शनिवार की सुबह नीली बत्ती लगी सरकारी बोलेरो से गांव पहुंचा। पूर्व बीडीसी सदस्य मोतीलाल मौर्य (45) जानवरों के लिए मशीन में चारा काट रहा था।

उसने चारा काट रहे मोतीलाल को अपने पास बुलाया। करीब आते ही दोनों के बीच कुछ बातचीत हुई। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर ने अपनी कमर में लगी लाइसेंसी रिवाल्वर निकाली और मोती की कनपटी पर सटाकर गोली मार दी। फायर की आवाज सुनकर मोती के बेटे व दूसरे लोग दौड़ पड़े। लोगों को करीब आते देख जंग बहादुर ने रिवाल्वर तानते हुए आगे बढ़ने पर गोली मारने की धमकी दी। उसके सिर पर खून सवार देख लोग पीछे हट गए। जंग बहादुर अपने परिजनों को बोलेरो में बैठाने के बाद वहां से भाग निकला।
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खून से लथपथ मोतीलाल को लेकर परिजन दूसरे वाहन से अस्पताल की ओर भागे। जिला अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिजन रोने बिलखने लगे। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर एसपी अखिलेश कुमार चौरसिया व एएसपी पूर्वी अखिलेश्वर पांडेय, सीओ पट्टी श्रीकृष्ण वर्मा कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। घटना की छानबीन करने के बाद अधिकारियों के निर्देश पर आरोपी की खोजबीन के लिए आसपुर देवसरा, फतनपुर, अंतू एसओ को लगाया गया है।

वाराणसी, भदोही व लखनऊ में भी विभागीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। एसपी ने बताया कि हत्यारोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है। घटना के अहम बिंदुओं की छानबीन भी की जा रही है। हर हाल में डिप्टी कमिश्नर की गिरफ्तारी होगी। बता दें कि मोतीलाल वर्ष 2000 में बीडीसी सदस्य चुना गया था। वर्ष 2005 में भी किस्मत ने साथ दिया और वह बीडीसी सदस्य चुन लिया गया। उसके इस बार भी चुनाव लड़ने की तैयारी की चर्चा ग्रामीण कर रहे थे।

डिप्टी कमिश्रर के खिलाफ मृतक के बेटे की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हत्यारोपी की तलाश में पुलिस की तीन टीमें लगाई गई हैं। पूर्व बीडीसी की हत्या में डिप्टी कमिश्नर के पारिवारिक विवाद की बात सामने आ रही है।
अखिलेश्वर पांडेय, अपर पुलिस अधीक्षक, पूर्वी।

थाना क्षेत्र के सारडीह निवासी फतेह बहादुर और जंग बहादुर के बीच काफी दिनों से तनातनी चली आ रही थी। फतेह बहादुर का मोती के साथ उठना-बैठना उसे पसंद नहीं था। उसे शक था कि मोतीलाल फतेह बहादुर को उकसाता है और मदद भी करता है। यही शक शनिवार को घटना का कारण बन गया।

फतेह बहादुर तीन भाई और जंग बहादुर दो भाई हैं। फतेह बहादुर के दूसरे नंबर के भाई दारा सिंह की मौत करीब दो साल पहले हो चुकी है। दारा का लड़का अंकित सिंह फतेह बहादुर के साथ रहता है। दोनों परिवारों के बीच करीब पांच वर्ष पूर्व पैतृक संपत्ति को लेकर रार ठनी। संपत्ति को लेकर जो समझौता हुआ तो उस पर फतेह बहादुर खरा नहीं उतरा। इस वजह से विवाद बढ़ता ही चला गया।

परिवार से कलह के बाद फतेह बहादुर और अंकित का मोतीलाल के घर उठना-बैठना होने लगा। चूंकि मोती के भतीजे ने घर के करीब ही पान की दुकान खोल रखी थी इसलिए लोगों का आना-जाना लगा रहता था। जंग बहादुर को शंका था कि मोती के उकसावे में आकर फतेह बहादुर मनमानी कर रहा है। इसके चलते डिप्टी कमिश्नर ने मोती को भी दुश्मन मान लिया था।

डिप्टी कमिश्नर आबकारी वाराणसी जंगबहादुर सिंह के सिर पर जैसे खून सवार था। शनिवार को घर पहुंचने के बाद वह परिजनों से मिलने नहीं गया। वह बोलेरो से उतरते ही अपने चचेरे भाई व भतीजे को खोजने लगा। वे नहीं मिले तो घर के बाहर चारा काट रहे मोतीलाल को बुलाया और गोली मार दी। वह बार- बार अपने चचेरे भाई व भतीजे को ललकारते हुए सामने आने के लिए कहता रहा।

डिप्टी कमिश्नर जंग बहादुर सिंह शनिवार को सरकारी वाहन से घर पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो वह वाहन से उतरते ही चचेरे भाई फतेह बहादुर व भतीजे अंकित सिंह को खोजने लगा। वे घर के बाहर नहीं निकले। जंग बहादुर बराबर सभी को ललकारता रहा। किसी के बाहर न आने पर वह सड़क के सामने बने मोतीलाल के घर की ओर चल पड़ा। चारा काट रहे मोतीलाल को उसने आवाज देकर बुलाया।

करीब आते ही उसे गोली मार दी। इसके बाद परिजन दौड़े तो सभी की ओर रिवाल्वर तानते हुए धमकाया कि आगे बढ़ने का अंजाम मौत है। वह अपने घर की ओर आया और चचेरे भाई व भतीजे को ललकारने लगा। दोनों बाहर नहीं निकले। इस बीच परिवार की महिलाओं को अपने वाहन में बैठाने के बाद वह रिवाल्वर लहराते हुए भाग निकला। कुछ लोगों ने पीछा भी किया, लेकिन कुछ ही देर में वाहन लोगों की आंखों से ओझल हो गया।
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