जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दी हैं। सोमवार को मासूम पूनम के शव को ले जाने के लिए शव वाहन नहीं दिया। पूनम का शव उसका मामा कांधे पर रखकर ले गया था। इससे नाराज डीएम ने रिपोर्ट दर्ज करा दी तो विरोध में मंगलवार की सुबह जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी। डॉक्टरों के गुस्से का शिकार गंभीर हालत में प्रसव को लायी गई नगमा (24) हुई। ढाई घंटे तक उसका इलाज नहीं हुआ। इससे उसकी मौत हो गई। एक और मरीज इमरजेंसी में तड़पता रहा। जानकारी होने पर डीएम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की चेतावनी दी, तब डॉक्टर ओपीडी में बैठे और इलाज शुरू किया।
मलाकसद्दी निवासी अनंत कुमार की सात माह की बेटी पूनम की जिला अस्पताल में सोमवार दोपहर इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वह डायरिया से पीड़ित थी। पूनम की मौत के बाद जिला अस्पताल से शव ले जाने के लिए शव वाहन नहीं दिया गया। मजबूरन पूनम का शव उसका मामा कांधे पर रखकर साइकिल से ले गया। जानकारी होने पर डीएम मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर इमरजेंसी वार्ड के चिकित्सक डॉ. विवेक केशरवानी के खिलाफ लोक सेवक द्वारा दायित्वों का सही निर्वहन न करने की रिपोर्ट मंझनपुर कोतवाली में दर्ज करा दिया। इसकी जानकारी होते ही मंगलवार की सुबह से जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने हड़ताल शुरू कर दी।
ओपीडी में चिकित्सक नहीं बैठे। इमरजेंसी वार्ड का भी स्टाफ गायब रहा। इसी दौरान प्रसव पीड़ा होने पर रहीमपुर मोलानी की नगमा पत्नी सलमान प्रसव के लिए आई। ढाई घंटे तक चिकित्सकों ने उसका इलाज नहीं किया। स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारियों ने भी उसकी मदद नहीं की। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे निजी अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इमरजेंसी वार्ड के बाहर भी एक मरीज तड़पता रहा, लेकिन उसका इलाज नहीं किया गया। इसके बाद डॉक्टर डीएम से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। डीएम को जब जानकारी हुई कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं तो उन्होंने संयुक्त रूप से कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद डॉक्टर वापस आए और मरीजों का इलाज शुरू किया।