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साइबर शातिरों का मोबाइल पर हमला

Sun, 28 Dec 2014 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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सावधान! कहीं कोई गलत आदमी आपके फोन पर प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि के नंबर से फोन कर धमकी या वसूली कर रहा है। यह खेल वह एक खास साफ्टवेटर के जरिए कर रहा है। इसमें आपके फोन बुक में जिस नाम से वह नंबर दर्ज होगा, वही स्क्रीन पर भी दिखाई देगा, जिससे । प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सचिवालय के अधिकारी या फिर किसी मंत्री का फोन समझ जिससे आप बात कर रहे हैं परख लीजिए की फोन उसी का है या फिर किसी और का। खासतौर से एंड्रायड फोनधारक तो ज्यादा ही सतर्क रहें। इस तरह का मामला पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में आ चुका है और जांच शुरू हो गई। इस तरह के साइबर क्राइम में लिप्त कई लोग चिह्नित हो चुके हैं।
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जिले में आम लोगों के साथ अफसरों के मोबाइल पर एडीएम, एएसपी या फिर सचिव बनकर धमकाने का मामला प्रकाश में आया है। इससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। एंड्रायड मोबाइल धारक गूगल प्लेस्टोर सॉफ्टवेयर के जरिए कुछ लोग साइबर क्राइम में लिप्त हैं। वे आपके मोबाइल पर इस तरह फोन करेंगे कि जिस अधिकारी या नेता का फोन नंबर सेव है, उसी का नाम आ जाएगा। आप वही समझकर बात भी कर लेंगे। फोन करने वाला उसके बाद आपको ब्लैकमेल करना शुरू कर देगा। इसलिए जब भी ऐसा कोई नंबर आए तो पुष्टि कर लीजिए की उसने फोन किया भी था या नहीं। कुछ लोग जब इस तरह की ठगी का शिकार हुए तो उन्होंने डीएम अमृत त्रिपाठी से शिकायत की। इस तरह के साइबर क्राइम को गंभीरता से लेते हुए एसपी को जानकारी दी और कठोर कार्रवाई की रणनीति तैयार की। कुछ लोग चिह्नित हो चुके हैं। पुलिस और लोगों को तलाश रही है ताकि लोगों को एक साथ पकड़ा जा सके।   
केस-1 - शुकुलपुर निवासी रविकेश के मोबाइल पर गुरुवार को एसडीएम का फोन आया। चूंकि वह एसडीएम का सीयूजी नंबर उसके मोबाइल में फीड था। एसडीएम का नंबर देख वह चौंक पड़ा। हड़बड़ाहट में उसने फोन रिसीव किया। एसडीएम के नंबर से बोल रहे व्यक्ति ने कहा कि तुम्हारा मकान अवैध तरीके से बना है। उसे गिरा दिया जाएगा। इसे रोकना हो तो आकर मिलो। यह सुनते ही उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। हालांकि उसने फिर से फोन मिलाकर बात की तो सच्चाई का पता चला।
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केस-2- नगर के सदर बाजार निवासी महताब आलम के पास शुक्रवार को लखनऊ से एक सचिव के सीयूजी नंबर से फोन आया। उसने अपना परिचय देते हुए कहा कि वह जिलाधिकारी से जाकर मिले। वरना उसका भारी नुकसान हो जाएगा। उसके विरोधियों ने उसके खिलाफ काफी शिकायत की है। यह सुनते ही महताब के होश उड़ गए। जिस नंबर से फोन आया था उसका हवाला देते हुए वह जिलाधिकारी से मिलने पहुंच गया। डीएम ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया। मोबाइल नंबर लखनऊ के एक अधिकारी का सीयूजी नंबर था। ऐसे में जिलाधिकारी ने उनसे भी बात की तो फर्जी काल की पोल खुल गई।
केस-3- विकास विभाग के एक अधिकारी के पास शनिवार को लखनऊ के एक अफसर के नंबर से फोन आया। लखनऊ से बोलने वाले अफसर ने उससे विभाग की जानकारी लेने के साथ ही कई मामलों में सत्ता दल के नेताओं द्वारा शिकायत किए जाने की बात बताई। मामले को रफा दफा करने के लिए मिलने को कहा गया। दो घंटे बाद जब अफसर ने फिर उसी नंबर पर फोन किया तो पता चला उन्होंने तो कोई फोन ही नहीं किया था। अफसर ने जिलाधिकारी को इस बात की जानकारी दी।
डीएम ने बताया कि विदेशी साफ्टवेयरों के जरिए नंबर बदल कर विभिन्न लोग अधिकारी बनकर फोन कर रहे हैं। ऐसे लोगों के फोन से अफसर से लेकर आम जनता को भी सचेत रहना होगा। पुलिस अधीक्षक को ऐसे लोगों को चिन्हित कर साइबर क्राइम के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई को कहा गया है। यदि लोगों के पास इस तरह के कोई फोन आते हैं तो वे उस फोन की सत्यता अवश्य पता कर लें।
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