पत्नी की हत्या करने के बाद कातिल पति रमऊ पड़ोसी गांव रघवापुर पहुंचा। वहां अपने कई परिचितों को अपने कृत्य की जानकारी देने के बाद मदद मांगने लगा। उसकी बात सुन लोगों ने उसे अपने घर से भगा दिया। इधर कार्रवाई की आशंका में पहले ही परिजन भाग निकले थे।
रमापति उर्फ रमऊ ओझा ने अपनी पत्नी माला की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इसके बाद वह घर से भाग निकला। भोर में वह रघवापुर में अपने आधा दर्जन परिचितों के घर पहुंचा। सभी को अपने कृत्य की जानकारी देते हुए मदद मांगने लगा। उसकी बात सुनने के बाद पहले तो किसी को भरोसा नहीं हुआ। बाद में लोगों ने पता लगाया तो घटना सच निकली। इसके बाद लोगों ने उसे घर से भगा दिया। इस बीच पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए रमऊ के पिता रामतीरथ और मां रामसंवारी घर छोड़कर भाग निकले। मौके पर पहुंची पुलिस खोजबीन करने लगी, लेकिन वे नहीं मिले। बताते हैं कि रमऊ ग्रामीणों के सामने खुद को मनोरोगी साबित करने का भी प्रयास करता रहा।
भगीरथपुर डांडी निवासी रामतीरथ करीब के ही एक इंटर कालेज से बड़े बाबू के पद से रिटायर हुए थे। रमऊ भी कोई काम-धंधा नहीं करता था। इसलिए पूरा परिवार रामतीरथ पर निर्भर रहता था। रामतीरथ अपने बड़े बेटे के साथ रहता था, लेकिन विवाद को देखते हुए माला के बेटे अमन की खुद परवरिश करता था।
रामतीरथ के परिवार में घर का खर्च चलाने के लिए हमेशा विवाद होता रहता था। ग्रामीणों की मानें तो रमऊ अक्सर अपने पिता से रुपये मांगता रहता। माला भी घर का खर्च चलाने के लिए ससुर से ही रुपये की मांग करती। इसे लेकर अक्सर उनके बीच तकरार होती रहती थी।
डांडी निवासी रमापति ओझा और उसकी पत्नी माला के बीच शादी के बाद से अनबन शुरू हुई। दोनों को एक दूसरे पर भरोसा नहीं था। तभी तो अमन का जन्म होने के बाद ही दोनों में अलगाव हो गया। ग्रामीणों की मानें तो न्यायालय में मुकदमा भी चला। चार साल पहले उनके बीच समझौता हो गया। इस शर्त पर माला की विदाई हुई कि वह अपने काम से काम रखेगी। परिवार के लोगों के साथ उसका कोई उठना-बैठना नहीं होगा।