फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी आईडी बनाकर सिम बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश

Tue, 08 Sep 2015 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
फर्जी आईडी तैयार कर मोबाइल सिम बेचने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। हालांकि इस गिरोह का सरगना पुलिस के हाथ नहीं लग सका। उसके तीन साथियों को क्राइम ब्रांच की टीम ने धर दबोचा। उनके पास से बड़े पैमाने पर फर्जी आईडी, एक्टिवेटेड सिम व दूसरे सामान बरामद हुए हैं। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
विज्ञापन


जिले में गलत पते से लिए गए मोबाइल सिम का प्रयोग आपराधिक घटनाओं में हो रहा है। पुलिस ऐसे लोगों को दबोचने के लिए परेशान थी। पुलिस अधीक्षक अखिलेश कुमार चौरसिया के आदेश पर क्राइम ब्रांच स्वाट टीम प्रभारी मनोज शुक्ला ने मंगलवार को मोहनगंज से दो लोगों को धर दबोचा। पकड़े गए सुरेंद्र कुमार तिवारी पुत्र तीर्थराज तिवारी निवासी गौरा पूरे बदल थाना फतनपुर और पवन कुमार मिश्रा पुत्र कृष्णकांत मिश्रा नेवादा थाना होलागढ़ जनपद इलाहाबाद की तलाशी ली। उनके पास से फर्जी आईडी से चालू 40 सिम, 500 से अधिक एक्टीवेट करने के लिए लिया गया सिम, दो सौ के करीब फर्जी आईडी व फोटो, दो मोबाइल बरामद हुए।

 पुलिस ने कर्रा किया तो दोनों ने बताया कि लालगंज में प्रमोद वर्मा की दुकान से वे फर्जी आईडी बनवाते हैं। पुलिस ने वहां छापेमारी कर अजय कुमार वर्मा पुत्र बेनी माधव वर्मा निवासी धर्मराज तुलई को धर दबोचा। दुकान से 4 सौ से अधिक फर्जी आईडी, हजारों की संख्या में दूसरों की फोटो, मतदाता सूची, लैपटाप, प्रिंटर, बरामद हुआ। मुख्य आरोपी प्रमोद पुलिस के हाथ नहीं लगा। पूछताछ में पकड़े गए लोगों ने बताया कि अब तक दस हजार से अधिक सिम फर्जी आईडी से एक्टिवेट किया जा चुका है। तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जेल भेजने की तैयारी शुरू कर दी। कार्रवाई में राघवेंद्र दुबे, जमशेद खां, मनोज यादव व कोतवाली पुलिस साथ रही।
विज्ञापन


स्वाट टीम प्रभारी मनोज शुक्ला ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि लोगों को धोखा देने के लिए गलत आईडी बनाने वाले लोग सिम के अलावा दूसरे कार्यों में भी फर्जी आईडी का प्रयोग करते रहे हैं। गांव के लोगों की हजारों फोटो इस बात की गवाह थीं कि वे मतदाता सूची अपलोड करने के बाद लैपटाप से फोटो हटा देते थे। इसके बाद दूसरे की फोटो उसी पर चस्पा कर देते थे। इसके बाद सिम एक्टिवेट कराने में सफल हो जाते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें