अपमान की आग ने दो परिवारों को जला दिया। एक की जान गई तो दूसरा उसकी हत्या कराने में जेल की सलाखों के पीछे जाकर अपनी नौकरी भी गंवा दी। मामले की शुरूआत बीते 1 अप्रैल 14 को हुई थी जब शिक्षक देवेन्द्र पांडेय ने प्रधानाध्यापक रामनेवाज की पत्नी सोना को यह कहकर अपने पति को फोन कराया कि उसका एक्सीडेंट हो गया है।
शिक्षामित्र सोना ने पति के बुलाने के लिए झूठ बोलने से मना किया तो देवेंद्र ने उस पर दबाव बनाकर बुलाया। हेडमास्टर रामनेवाज ने एसपी को बताया कि देवेंद्र ने उसकी पत्नी से कहा था कि अप्रैल फूल ऐसे ही मनाया जाता है। फोन पर पत्नी के एक्सीडेंट की खबर मिलने पर प्रधानाध्यापक भागते हुए आया लेकिन सत्यता जानने पर दो तमाचे भी शिक्षक देवेन्द्र को जड़ दिए थे। यहीं से विवाद की नींव पड़ गई।
देवेंद्र ने इस तमाचे को अपना अपमान समझा और वह प्रधानाध्यापक की पत्नी की शिक्षामित्र की नौकरी के पीछे पड़ गया। हालांकि इस मामले में हेडमास्टर की पत्नी ने शिक्षक देवेंद्र से क्षमायाचना भी की लेकिन वह नहीं पिघले और अंतत: मई में सोना देवी की बर्खास्तगी हो गई। पत्नी की बर्खास्तगी ने हेडमास्टर कोे क्रोध की आग में झोंक दिया और वह दिन ब दिन केवल बदला लेने का तानाबाना बुनता रहा और फिर अपने साथियों की मदद से शिक्षक देवेंद्र को मौत के घाट उतार दिया।