प्रतापगढ़। जिले में 13 पुस्तकालय खोले गए हैं, लेकिन इनकी देखरेख करने के लिए न तो कर्मचारियों की तैनाती की गई हैं और न ही किताबें रखी गई हैं। सभी पुस्तकालय बंद पड़े हैं। अब चार लाख की लागत से सांसद निधि से तीन पुस्तकालयों के लिए भवन का निर्माण होने जा रहा है। सपा सरकार में जनपद के 13 गांवों में मिनी पुस्तकालय खोले गए थे। यह पुस्तकालय कहीं पंचायत भवन में तो कहीं प्राथमिक विद्यालय या फिर एफसीआई गोदाम में संचालित हो रहे थे। इनके देखरेख करने के लिए एक पुस्तकालय प्रभारी और एक सहायक की तैनाती मानदेय पर की गई थी। इन पुस्तकालयों में नाम मात्र की किताबें रखी गई थीं।
करीब एक साल तक चले इन पुस्तकालयों के प्रभारियों को फूटी कौड़ी शासन की ओर से नहीं मिला। इसके चलते वह काम छोडक़र भाग निकले। वहीं सहायकों को सात हजार रुपये मानदेय मिल रहा था। आठ माह बाद सहायकों के मानदेय पर ग्रहण लग गया। उनका कार्यकाल भी खत्म हो गया। कर्मचारियों का न तो रिन्यूवल किया गया और न ही दूसरे किसी की तैनाती की गई। इसके चलते गांवों में खुले इन पुस्तकालयों में ताला लटकने लगा। ज्यादातर पुस्तकालयों में रखीं किताबें गायब हो गईं। अब सांसद निधि से 13 में से तीन पुस्तकालयों को आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। चार लाख की लागत टेऊंगा, सहेरुआ व विकास भवन के पास स्थित पुस्तकालय के भवन का निर्माण किया जाएगा।