होटलों, ढाबों और नास्ते की अन्य दुकानों पर काम करने वाले बच्चों के ऊपर श्रम विभाग के अफसरों की नजर है। धर पकड़ के लिए जिले में मंडलीय टीम ने डेरा डाल दिया है।
टीम में जिले के श्रम अधिकारी भी शामिल हैं। वह लोग काम करने वाले बच्चों को उठा कर बाल कल्याण समिति ले जाएंगे। शहर के रोडवेज बस अड्डा व वीएस मेमोरियल के पास से दो बाल श्रमिकों को टीम ने पकड़ा है।
आर्थिक तंगी से गुजर रहे परिवार के तमाम बच्चे कच्ची उम्र में होटलों, ढाबों और नास्ते की अन्य दुकानों पर दूसरों का जूठन धोने को मजबूर हैं। प्रतिष्ठान संचालक उन बच्चों के परिवार की विवशता का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। हजार, डेढ़ हजार रुपए में उनसे 18 से 20 घंटे काम लेने के साथ झिड़कते भी रहते हैं।
शासन के निर्देश पर उन बाल श्रमिकों पर श्रम अफसरों ने नजर टिका ली है। शहर से लेकर अन्य बड़े बाजारों में इस तरह का काम करने वाले बच्चों को मुक्ति दिलाने के लिए मंडलीय टीम जिले में है।
टीम में शामिल जिला श्रम अधिकारी जनपद की स्थिति से मंडलीय टीम को अवगत कराते रहेंगे। वह टीम शहर के रोडवेज बस अड्डे पर एक चाट की दुकान से संदीप नामक एक बालक को पकड़ा है।
संदीप ने टीम को बताया कि वह बाबूगंज का निवासी है। उसके जरिए बताई गई काम करने की विवशता को भी टीम ने नोट किया है। इसी तरह मीराभवन वीएस मेमोरियल स्कूल के पास चाय की दुकान पर एक बालक को काम करते हुए टीम के अफसरों ने पकड़ा है।
अधिकारियों के मुताबिक चाय की दुकान पर काम करने वाला बालक संग्रामगढ़ का था। दोनों बालकों को टीम अपने साथ गाड़ी में बैठा कर सीएमओ कार्यालय ले गई।
सीएमओ के निर्देश पर बालकों के उम्र का जिला अस्पताल में परीक्षण हुआ। श्रम प्रवर्तन अधिकारी इलाहाबाद घनश्याम शुक्ल व जिले के श्रम प्रवर्तन अधिकारी कमलेश कनौजिया ने बताया कि वे लोग टीम को बाल कल्याण समिति ले जाएंगे। यदि वे बालक चाहेंगे तो वहां उनके रहने, खाने व पढ़ने की व्यवस्था समिति के लोग करेंगे। अगर उनकी इच्छा होगी तो उन बालकों को बाल कल्याण समिति की लिखा-पढ़ी कर उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
बाल श्रम के खिलाफ मंडलीय टीम में शामिल अफसर पूरे जिले में अभियान चलाएंगे। दुकानों, ढाबों और होटलों में बालकों से काम कराने वाले प्रतिष्ठानों के संचालकों को अधिकारी नोटिस भी देंगे। उनके जरिए सही जवाब न दिए जाने पर श्रम विभाग संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज करेगा।
इलाहाबाद से टीम ने अभियान में भ्रमण के लिए बड़ी गाड़ी मंगाई है। टीम में शामिल अफसरों के साथ वह गाड़ी भी चलेगी। उस गाड़ी में कम से कम दो दर्जन बाल श्रमिकों को आसानी से बैठाया जा सकेगा। गाड़ी में उन बालकों के सुरक्षा का भी तगड़ा बंदोबस्त होगा।