ग्रामीण बैंक के भीतर चोरों के घुसने के लिए पुलिस के साथ ही बैंक प्रबंधन भी कम जिम्मेदार नहीं है। पिछले साल भी सेंधमारी होने के बाद भी न तो पुलिस ने गंभीरता दिखाई और न ही बैंक प्रबंधन ने सतर्कता बरतने की जरूरत समझी। ऐसे में एक बार फिर चोर बैंक की तिजोरी तक पहुंच गए।
मंगरौरा ग्रामीण बैंक में पिछले साल भी चोर सेंध काटकर भीतर घुस गए थे। हालांकि चोर अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हुए लेकिन पुलिस सेंधमारी करने वालों का पता नहीं कर सकी। बैंक प्रबंधन भी बेफिक्र रहा।
बैंक के भीतर न तो एलार्म ठीक कराया गया और न ही सीसीटीवी कैमरा लगाया गया। बैंक के भीतर प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं की गई थी। ऐसे में चोरों को भरपूर मौका मिला। शायद वे पुलिस से भी पूरी तरह से बेफिक्र थे। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि गश्ती सिपाही बाजार में कम ही दिखते हैं।
कोई एक माह पहले बाजार में हत्या होने के बाद भी कोई बदलाव नहीं आया। हत्यारोपी नामजद होने के बाद भी नहीं पकड़े जा सके। उस घटना के बाद तो दुकानदारों भी खौफ घर कर गया है। लोग शाम होते ही अपने घरों को चले जाते हैं।