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देर रात मांग पूरी होने पर उठाया गया शव

Wed, 16 Mar 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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अधिवक्ता जवाहरलाल मिश्र की हत्या के बाद आक्रोशित वकील शव जिला जज के चैंबर के बाहर पोर्टिको में रखकर धरने पर बैठ गए थे। मांगें पूरी होने तक शव न उठाने का ऐलान किया। देर रात शासन ने वकीलों की सभी मांगों को पूरा करने की बात कही। तब जाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।
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दीवानी न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं ने शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। अधिकारियोें के सामने मांगों को रखते हुए कहा कि मृतक अधिवक्ता जवाहरलाल की विधवा को आजीवन पेंशन दी जाए। अश्रितों को नौकरी के साथ ही 50 लाख रुपये दिए जाएं। दोनों बेटों के जानमाल की सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस के साथ ही सुरक्षाकर्मी भी दिए जाएं। हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार कर घटना की सीबीआई से जांच कराई जाए। अधिवक्ताओं की मांगों पर कई घंटे तक मंथन करने के बाद रात करीब पौने नौ बजे वकीलों को बताया गया कि मृतक परिवार को शासन से बीस लाख रुपये की मदद मिलेगी। नौकरी के लिए भी सरकार ने मंजूरी दे दी है। अन्य मांगों को भी पूरा किया जाएगा। इसके बाद वकील धरना समाप्त किए और शव को पोस्टमार्टम के लिए लेकर निकले। भारी संख्या में पुलिस बल भी पीछे-पीछे मर्चरी पहुंचा।

सीजे व सीएम को बुलाने की जिद पर थे अड़े
साथी की हत्या से खफा अधिवक्ता चीफ जस्टिस के साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री को बुलाने की जिद पर अड़े थे। उनकी मांग थी कि दोनों लोगों के आने के बाद ही शव हटेगा। हालांकि बाद में सीनियर अधिवक्ताओं ने मामले को संभाला और सभी को समझा बुझाकर शांत कराया।
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मुआवजे की बात पर डीएम पर भड़के वकील
जूबाए के पूर्व उपाध्यक्ष जवाहरलाल मिश्र के शव को लेकर अधिवक्ता दीवानी न्यायालय परिसर में पहुंचे। पोर्टिको में शव रखकर विरोध जताने लगे। इस बीच जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों को वकीलों के गुस्से का सामना करना पड़ा। इस बीच जैसे ही डीएम ने मुख्यमंत्री का संदेश सुनाते हुए यह कहा कि मृतक अधिवक्ता के परिजनों को दस लाख रुपये दिया जाएगा। यह सुनते ही वकील भड़क उठे। वे बोल पड़े कि वकील हत्यारों को पकड़कर सजा दिलाने के बदले बीस लाख दे सकते हैं। ऐसे रुपये की कोई जरूरत नहीं है। माहौल खराब होने से पहले ही दोनों अधिकारी वहां से निकल गए।

कुछ दिन पहले ही छूटे थे बेटे के ऊपर जानलेवा करने के आरोपी
अधिवक्ता जवाहरलाल मिश्र के बेटे संजीव मिश्र के ऊपर 13 नवंबर 2015 को जानलेवा हमला हुआ था। चचेरे भाई की गोली लगने से मौत हो गई थी। जबकि संजीव की हालत खराब थी। इस मामले में परिवार के लोगों ने लालगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। वकीलों की मानें तो कुछ दिन पहले ही आरोपी जेल से जमानत पर छूटे हैं। उनके जेल से छूटने पर वह खुद की जान को खतरा बता रहे थे।
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