प्रदेश में सपा की सरकार बने चार साल हो गए। इस सरकार के कार्यकाल में जनपद के पांच वकीलों की हत्या कर दी गई। रंजिश की जानकारी के बाद भी अफसर लापरवाही बरतते हैं। जिससे ऐसी घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। प्रदेश में सपा की सरकार 15 मार्च 2012 को बनी थी। तब से जनपद में कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं रह गई है। अंतू थाना क्षेत्र के सरायवीरभद्र आदमपुर निवासी अधिवक्ता विमल मिश्र अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते रह गए, लेकिन जिम्मेदारों ने उनकी समस्या का निराकरण करना बेहतर नहीं समझा। इसके चलते पड़ोसियों ने उनकी हत्या कर शव सई नदी में फेंक दिया।
इसे लेकर भी वकीलों ने तत्कालीन एसओ चंद्रबली यादव के खिलाफ मोर्चा खोला था। जूबाए अध्यक्ष राजदत्त मिश्र की कचहरी आते समय 19 दिसंबर 2013 को कंधई थाना क्षेत्र के शिवसत गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना को बीते तीन माह भी नहीं हुआ था कि सदर तहसील में 10 मार्च 2014 को अधिवक्ता प्रभाकर सिंह मीनू को बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार दी थी। दोनों घटनाओं की एसआईटी ने जांच की। अक्तूबर 2015 में अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की घर के करीब ही फुलवरिया के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। मंगलवार को अधिवक्ता व जूबाए के पूर्व उपाध्यक्ष जवाहरलाल मिश्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सपा सरकार के चार साल के शासन में 5 अधिवक्ता बदमाशों की गोली के शिकार बन गए। इसके अलावा अधिवक्ता आरिफ के ऊपर भी एसपी आवास के करीब हमला हुआ था। कई दिनों के इलाज के बाद वह ठीक हुए थे।