पांच रुपये की 62 साल पुरानी एनएससी ने डाक विभाग में बवंडर मचा दिया है। दरअसल यह एनएससी 1956 में सुवंसा शाखा में कराई गई थी। सफाई के दौरान एक पुरानी किताब में मिली पिता की इस एनएससी को भुनाने के लिए जब बेटा डाकघर पहुंचा तो सब हैरान रह गए। एक डेस्क से दूसरे डेस्क एनएससी घूमती रही लेकिन भुगतान कैसे करना है कोई समझ नहीं पाया। नियम जानने के लिए विशेषज्ञों की राय भी ली गई। फिलहाल बाद में आने को कहकर निस्तारण के लिए पन्ने पलटे जा रहे हैं।
रानीगंज तहसील क्षेत्र के पूरे गोसाई निवासी निवासी रामप्यारे पटेल के पिता दस्सु पटेल ने 19 अप्रैल 1956 में सुंवसा स्थित डाकघर शाखा में 5 रुपये की एनएससी कराई थी। 19 अप्रैल 1968 में एनएससी की परिपक्वता राशि 8 रुपये मिलनी थी, लेकिन इसके पहले ही दस्सु का निधन हो गया। एनएससी के बारे में वह किसी को बता नहीं सके। इस बार होली पर रामप्यारे घर की सफाई कर रहे थे तभी कमरे में रखी पुरानी किताब में यह एनएससी हाथ लगी।
राम प्यारे सुंवसा व गौरा शाखा में एनएससी भुनाने पहुंचे तो किसी को कुछ समझ नहीं आया। उन्हें बाद में आने को कह गिया गया। वह मंगलवार को प्रधान डाकघर पहुंचे। यहां कर्मचारियों को पुरानी एनएससी दिखाकर भुगतान के संबंध में सवाल किया तो सब चकरा गए। काफी जद्दोजहद के बाद भी कुछ तय नहीं हुआ तो उनको यह कहकर टरका दिया गया कि संबंधित शाखा में ही इसका रिकार्ड होगा वहीं से कुछ हल निकलेगा। दरअसल राम प्यारे यह भी जानना चाहते हैं कि उन्हें भुगतान मिलेगा कितना लेकिन यह कोई बता नहीं पा रहा है।
एनएससी जिस शाखा की है उसका रिकार्ड उसी शाखा में होगा। नियमों को देखकर वहीं से उसका निस्तारण हो सकता है। हालांकि मुझे उनके डाकघर में आने की जानकारी नहीं है
- एके द्विवेदी, सीनियर पोस्ट मास्टर, प्रधान डाकघर
नियमानुसार परिपक्वता तिथि तक के भुगतान के साथ अब तक का ब्याज दिया जाएगा, अगर कोई दिक्कत होती है तो ग्राहक मुझसे मिले भुगतान करा दिया जाएगा
-एसके राय, निदेशक, डाक सेवाएं इलाहाबाद मंडल