शिवगढ़। खेत के किनारे बाड़ में अवैध ढंग से दौड़ाए गए विद्युत करंट की चपेट में आने से किसान की मौत के मामले में रविवार देर रात बेटे की तहरीर पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। घटना को लेकर अधिकारी सख्त कार्रवाई की बात कह रहे हैं, लेकिन उन पर सियासी दबाव भी है।
कंधई थाना क्षेत्र के गोंई गांव में बिजली विभाग के रिटायर्डकर्मी किसान रमाशंकर अपनी पत्नी कमलेश देवी के साथ रविवार रात दस बजे खेत में सिंचाई करने गए थे। उनके खेत के बगल पूरेधना निवासी काशी प्रसाद पांडेय का सबमर्सिबल पंप लगा है। वहां केले की खेती के लिए उसने लगभग तीन बीघे के क्षेत्र में चारों तरफ कटीले तारों से बाड़ बना रखी है जिसमें करंट प्रवाहित किया गया था। सिंचाई के दौरान ही रमाशंकर करंट की चपेट में आकर तार से चिपक गए और वहीं उनकी मौत हो गई। पत्नी कमलेश ने शोर मचाया तो गांववाले जुट गए।
करीब डेढ़ घंटे रमाशंकर तार से चिपका रहा। ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों को फोन लगाया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। बाद में सूचना पर पहुंचे सीओ पट्टी रमेशचंद्र, कंधई थानाध्यक्ष ने परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन देकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक की पत्नी कमलेश कुमारी ने मामले में ब्रजेश कुमार व राजेश कुमार पुत्र काशी प्रसाद पांडेय निवासी पूरेधना पट्टी को नामजद करते हुए तहरीर दी। सीओ पट्टी के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। गोईं गांव के किसान की करंट की चपेट में आने से मौत के बाद भी करीब डेढ़ बजे तक विद्युत आपूर्ति बाधित नहीं हो सकी थी। ग्रामीणों की मानें तो विद्युत विभाग के संविदा लाइनमैन व अन्य कर्मियों का मोबाइल स्विच ऑफ था। जानकारी पर पुलिस ने जेई पट्टी से संपर्क किया तब जाकर आपूर्ति बाधित की जा सकी।
खेत के लिए बनाए गए बाड़े में उतर रहे करंट की चपेट में आने से मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। इस तरह के हादसे पहले भी हो चुके हैं। गांवों में फसलों को जानवरों से बचाने के लिए अक्सर कटीले तारों का बाड़ा बना दिया जाता है। कई लोग उनमें अवैध रूप से करंट प्रवाहित कर देते हैं। रविवार को हुए हादसे से पहले दिलीपपुर के पास भी इस तरह एक व्यक्ति की करंट से मौत हो गई थी।अफसरों की लापरवाही के चलते ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं की जाती।