जेठवारा थाना क्षेत्र के चमरूपुर शुक्लान के बलीपुर परसन गांव में गरीबी
और बीमारी से तंग दंपति ने सल्फास निगलकर अपनी जान दे दी। घटना की जानकारी
होने पर हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर शनिवार की सुबह मौके पर पहुंची
पुलिस ने छानबीन के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जेठवारा
थाना क्षेत्र के चमरूपुर शुक्लान के बलीपुर परसन निवासी बाबूलाल (75) व
उसकी पत्नी बलराजी (70) आंख और सांस फूलने की बीमारी से परेशान थे। दोनों
अपने बेटे से अलग झोपड़ी में रहते हुए किसी तरह जीवन की गाड़ी खींच रहे थे।
ग्रामीणों की मानें तोदोनों बीमारी और गरीबी से जूझ रहे थे। उनके पास इलाज
के लिए पैसे नहीं थे। दो वक्त का भोजन भी बड़ी मुश्किल से नसीब हो रहा था।
इससे आजिज आकर शुक्रवार की रात दोनों ने रात में सल्फास की गोलियां एक
साथ निगल ली। रात करीब बारह बजे दोनों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उल्टियां
होने लगीं। मामले की जानकारी होने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।
सूचना
पर माता-पिता से दूर रहने वाला बेटा राजकुमार भी पहुंचा। आसपास के लोगों
की मदद से दोनों को इलाज के लिए लेकर भागा। घर से कुछ दूर जाने पर बाबूलाल
की सांसें थम र्गइं। मोहनगंज के करीब बलराजी की भी मौत हो गई। दोनों का शव
लेकर बेटे संग गांव के लोग घर लौट आए। शनिवार की सुबह घटना की जानकारी होने
पर गांव के साथ ही दूरदराज के लोग भी उसके घर पहुंच गए। सूचना मिलने पर
सीओ सदर राजेश कुमार नायक और एसओ दिनेश प्रकाश पांडेय मौके पर पहुंचे।
मामले की छानबीन करने के बाद वृद्ध दंपति के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज
दिया गया।
बीमारी और गरीबी से तंग आकर वृद्ध दंपति के जहर खाने से
मौत की बात सामने आई है। झोपड़ी में उल्टी हुई थी। सल्फास की टिकिया व
डिबिया भी मिली है। फिलहाल शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। उनकी
झोपड़ी में खाने-पीने का सामान बहुत कम मिला।
राजेश कुमार नायक, सीओ सदर
एसडीएम को शाम तक नहीं थी घटना की जानकारी
लालगंज
के उपजिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह को बलीपुर परसन गांव में वृद्ध
दंपति की मौत की जानकारी नहीं थी। उनसे वृद्ध दंपति की मौत के सिलसिले में
पूछा गया तो बोल पड़े कि उन्हें तो ऐसी किसी भी घटना की खबर नहीं है। ऐसा
है तो दोनों का नाम ही बता दिजिए। बलीपुर परसन तो मेरे ही क्षेत्र में आता
है। शासन से मिलने वाली सुविधाएं मिली थीं कि नहीं, यह नहीं बता सकते। ऐसा
है तो मामले को दिखवाते हैं।
ईंट भट्ठे पर करता था बेलदारी का काम
बलीपुर
परसन निवासी बाबूलाल युवा अवस्था से ही ईंट भट्ठे पर काम करता था। शरीर ने
जब तक साथ दिया तब तक वह ईंट भट्ठे पर बेलदारी का काम करता रहा। दो वर्ष
पहले उसका शरीर जबाव दे दिया। जिसके चलते वह घर पर ही रहने लगा। करीब सात
विस्वा जमीन थी। जिसमे उपजी फसल आधी मिल जाया करती थी। उसी से किसी तरह
दोनों काम चला रहे थे।
एक पैर से वृद्ध दंपति थे नि:शक्त
बाबूलाल
और बलराजी दोनों पैर से नि:शक्त थे। हालांकि दोनों को बहुत ज्यादा दिक्कत
नहीं होती थी। विकलांगता भी ऐसी नहीं थी जिससे काम धाम पर असर पड़ सके।
वृद्ध अवस्था में शरीर से दोनों कमजोर हो गए थे और चलने-फिरने में भी
समस्या थी।
दस साल से इकलौता बेटा रहता था अलग
बाबूलाल का इकलौता
बेटा राजकुमार है। वह अपने पिता के साथ रहता था। करीब दस वर्ष पहले बेटा
राजकुमार अपने माता-पिता से अलग परिवार के संग रहने लगा। बाबूलाल पुराना
मकान छोड़कर दरवाजे पर झोपड़ी डालकर रहने लगा। सीओ सदर ने बताया कि
बाबूलाल व उसकी पत्नी बलराजी दोनों ने शाकाहारी जीवन अपनाया था। जबकि
राजकुमार कभी कभार मांसाहारी भोजन करता था। जिसके चलते दोनों उससे अलग रहने
लगे। बताते हैं बाबूलाल ने अपनी पत्नी के साथ गुरूमंत्र ले लिया था। जिसके
चलते उसने अपनी दिनचर्या बदल ली थी।