महुली मंडी से बाहर किये गये आढ़तियों से चंदा मांगने पहुंचे मंडी के कर्मचारियों को उल्टे पंाव भागना पड़ा। आढ़तियों का आरोप था कि जब उनकी दुकानें मंडी से बाहर कर दी गई है तो समिति वाले चंदा किस बात कर मांग रहे हैं। इसको लेकर सब्जी और फल आढ़तियों के लोग लामबंद हो गये हैं। इस तरह की जबरन वसूली के खिलाफ सडक़ पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने का फैसला लिया है।
महुली मंडी के अंदर फल और सब्जी के आढ़तिये अपनी-अपनी दुकानें लगाते हैं। चूंकि चुनाव चल रहा था इसलिये मंडी समिति खाली करा ली गई। वहां से हटाये जाने के बाद फल के आढ़तियों ने सोनावा के पास अपनी दुकानें लगा ली और सब्जी वाले रंजीतपुर चिलबिला में अस्थाई तौर पर आ गये हैं। शनिवार को महुली मंडी समिति के कर्मचारी पहले की तरह चंदा वसूली का हक जताते हुए सोनावा पहुंच गये और आढ़तियों से चंदा मांगने लगे। व्यापारियों ने इसका विरोध किया बोले कि जब वे मंडी में फिर से दुकान लगाने आयेंगे तो चंदा दिया जायेगा। मगर समिति के लोग मानें नहीं। इसको लेकर तकरार बढ़ गई। गुस्साये आढ़तियों ने कर्मचारियों को दौड़ा लिया। वहां से भगाये जाने पर ये लोग रंजीतपुर चिलबिला पहुंचकर सब्जी व्यापारियों से वसूली करने के चक्कर में दबाव बनाने लगा। मगर यहां पर भी इनकी दाल नहीं गली। बाद में ये लोग चले गये। इनके जाने के बाद फल और सब्जी के आढ़तियों ने मिलकर इस कार्रवाई का विरोध किया। इनका कहना है कि जब तक उनको मंडी में जगह नहीं मिलेगी चंदा नहीं दिया जायेगा। बताया जाता है कि समिति ने वहां पर कारोबार करने वालों के लिये अलग-अलग चंदे की राशि तय की है। यह चंदा जायज है कि नहीं इस पर बोलने के लिये कोई तैयार नहीं हुआ।
वहीं मंडी से फल और सब्जी लेने वाले छोटे दुकानदारों ने आरोप लगाया है कि आढ़तिये उनसे भी वसूली करते हैं। पहले वे अपना माल बेंचते हैं उसके बाद माल बिकवाने के नाम पर अलग से धनराशि की वसूली करते हैं। जो भी फल या सब्जी खरीदी जाती है उसमें भी मनमानी घटतौली भी करते हैं। यानि छोटे दुकानदारों पर दोहरीमार पड़ रही है। फल विके्रता अरशद ने आरोप लगाया कि लोग सामान खरीदने का पैसा दें, बिकवाने का पैसा अलग से दें उसमें भी घटतौली की जा रही है। सब्जी विक्रेता ननकू का कहना है कि इसमें आढ़तियों की कमाई हो रही है। मारे जा रहे छोटे दुकानदार। इस बारे में आढ़तियों का कहना है कि ये पैसा मंडी समिति को चंदे के रूप में दिया जाता है।