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ठंड में दम तोड़ रहीं गाय

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कोहडौर में पंडरी पाल गौशाला में ठंड से बीमार पड़ी गायें। - फोटो : PRATAPGARH
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अफसर बंगले में, सर्दी से गोशालाओं में अंतिम सांसें गिन रहीं गायें
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कई मरने के कगार पर, नहीं हो रहा इलाज, बचाव के इंतजाम और देखभाल करने वाला कोई नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद भी जिला प्रशासन गोशालाओं में रखीं गायों की देखभाल में भारी लापरवाही बरत रहा है। जिले में बनाई गईं गोशालाओं में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए अभी तक इंतजाम नहीं हो सके हैं। कीचड़, गंदगी और अव्यवस्था के बीच गायें तड़प रही हैं। उनके चारे-पानी और देखभाल के लिए कहीं भी बेहतर इंतजाम नहीं हो सके हैं। ज्यादातर केंद्रों पर गायें बीमार पड़ी हैं। उनका इलाज तक नहीं किया जा रहा है। कुछ केंद्रों पर मरी गायों को पास में ही फेंक दिया गया। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी गो संरक्षण केंद्रों की हालत खराब है। ऊपर से गाय व गोवंश की देखभाल करने वाले प्रधान प्रशासन से मदद न मिलने के कारण कर्जदार हो चुके हैं। गायों की देखभाल कौन करेगा, उन्हें मेहनताना कौन देगा, इसे लेकर कुछ भी तय नहीं हो सका है। इससे प्रधान भी मुसीबत में हैं।
मंगरौरा विकासखंड के ग्राम सभा मलाक के चंद्रभानपुर में स्थित गो संरक्षण केंद्र में शनिवार दोपहर 12.15 बजे टीनशेड निर्माण का कार्य चल रहा था। मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए जो टीनशेड बना गया है, उसके किनारे-किनारे प्लास्टिक लगाई गई है। इस बीच प्रधान लाल प्रताप सिंह भी आ गए। कुछ दूरी पर दो गाय दम तोड़ती पड़ी मिलीं। एक बछड़ा भी अंतिम सांसें गिन रहा था। गड्ढे में पानी पीने का इंतजाम था तो बाहर बोरियों में उनका चारा डालने का। यहां कुल 58 गाय व गोवंश मिले। शुरूआत में यहां 70 के करीब मवेशी आए थे। सितंबर से संचालित गो संरक्षण केंद्र के निर्माण में प्रधान अपनी निधि से तीन लाख रुपये के ऊपर खर्च कर चुके हैं। यहां भूसा व पुआल दोनों मिला। सफाई करने के लिए 6 सफाई कर्मचारियों को लगाया गया है, लेकिन मौके पर केवल दो सफाईकर्मी सुनील व राजेश ही मिले। जो टीनशेड बना है वह मवेशियों के लिए पर्याप्त नहीं है।
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गोशाला बनवाकर 12 लाख के कर्ज में प्रधान, परिसर में ही फेंके थे मृत मवेशियों के शव
मंगरौरा विकासखंड के पड़रीपाल में खोले गए अस्थायी गो संरक्षण केंद्र का हाल भी बेहाल दिखा। यहां भी मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए किया गया इंतजाम नाकाफी दिखा। फरवरी माह में बनाई गई गोशाला में शुरु में 285 मवेशी रखे गए थे। बरसात में बहुत से मवेशियों को हटा दिया गया। प्रशासन की ओर से मवेशियों को चारा पानी के लिए तीस रुपये प्रति दिन के हिसाब से मिलता है। काफी दूरी में बने गो संरक्षण केंद्र में बरसात के चलते कीचड़ था। ठंड में गाय व बछड़े उसी में बैठे हुए थे। यहां जो छप्पर बनाया गया था वह 98 मवेशियों के लिए पर्याप्त न था। ढेर सारे जानवर सर्द रात में बाहर ही रहते हैं। यहां पीछे की ओर मृत बछड़े व गाय का शव फेंका गया था। जिन्हें कुत्ते नोंच रहे थे। पुआल से छप्पर बनाया जा रहा था। जो भूसा रखा मिला वह मवेशियों के लिए पर्याप्त नहीं था। प्रधान श्रीकांत पाठक ने बताया कि अभी तक करीब 22 लाख रुपये के करीब खर्च हो चुके हैं। उनके ऊपर किसानों व दूसरे लोगों का 12 लाख रुपये कर्ज है। राज्य व चौदहवें वित्त से मिली धनराशि गोसंरक्षण केंद्र के निर्माण और देखभाल में खर्च हो चुकी है। 11 सफाईकर्मी तैनात हैं, लेकिन मौके पर एक ही काम करते मिला। मवेशियों की देखभाल करने वाले मजदूर का खर्च तक नहीं मिल पाता।
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चंदीगोविंदपुर में बनी गोशाला का भी बुरा हाल
रानीगंज तहसील क्षेत्र के बांसी चंदीगोविंदपुर में खुले अस्थायी गो संरक्षण केंद्र में भी अव्यवस्था का बोलबाला दिखा। यहां गाय व बछड़ों को ठंड से बचाने के लिए किया इंतजाम नाकाफी है। सर्द रात में गाय व गोवंश बाहर रहते हैं। यहां साफ-सफाई का उचित प्रबंध देखने को नहीं मिला। बरसात के बाद बढ़ी ठंड से आधा दर्जन की संख्या में गायें अंतिम सांसें ले रही थीं। उनके खाने के लिए भूसा रखा हुआ था, लेकिन उसे गाय व गोवंशों तक डालने के लिए कोई नहीं दिखा। कहने को चार सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं, लेकिन एक भी नजर नहीं आए। पशु चिकित्सक के आने के बाद ही गो संरक्षण केंद्र का ताला खोला जा सका। यहां 162 जानवर रखे गए हैं। सर्दी में बीमार होकर गायें मरने की कगार पहुंच गई हैं। पशु चिकित्सक केवल औपचारिता निभाते नजर आए।
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