दिल्ली की निजामुद्दीन मरकज से प्रतापगढ़ आए तब्लीगी जमात से जुड़े 11 लोगों को जांच के लिए जिला अस्पताल के कलेक्शन सेंटर में रखा गया। कोरोना की जांच के लिए सभी का सैंपल लेकर लखनऊ भेजा गया है। इनमें एक बिजनौर तो 10 उत्तराखंड के रहने वाले हैं। उनके चार साथियों को नरसिंहगढ़ में ही रखा गया है।
कलेक्शन सेंटर में 10 दूसरे संदिग्ध मरीजों को भी जांच के लिए लाया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। जमात में आए सभी लोग थर्मल स्कैनर की जांच में ठीक मिले। कलेक्शन सेंटर में कुल 24 लोग रखे गए हैं।
तब्लीगी जमात से जुड़े कुछ सदस्य 14 मार्च के बाद प्रतापगढ़ आए थे। येलोग पुलिस व मजिस्ट्रेट की तलाश में नरसिंहगढ़ मस्जिद में मिले थे। नरसिंहगढ़ में मिले जमात के सदस्य थर्मल स्कैनर की जांच में ठीक मिले थे। सभी को गांव में ही बनी बंद पीएचसी में रखा गया था। गुरुवार की सुबह आला अधिकारियों की बैठक के बाद यह तय हुआ कि 14 मार्च के बाद दिल्ली निजामुद्दीन से आए तब्लीगी जमात से जुड़े 11 लोगों को जिला अस्पताल लाया जाए
। स्वास्थ्य विभाग की टीम उत्तराखंड के 10 और बिजनौर के रहने वाले एक सदस्य को जिला अस्पताल के कलेक्शन सेंटर ले आई। जहां से जांच के लिए सभी का सैंपल लिया गया। उसे लखनऊ भेजा गया है। शुक्रवार को रिपोर्ट आने की संभावना है।
रिपोर्ट आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में सभी को 14 दिनों तक रखा जाएगा। कलेक्शन सेंटर में पहले से ही थरिया के टैक्सी चालक समेत तीन लोग रखे गए हैं। जिले के अलग-अलग स्थानों से 10 अन्य लोगों को भी संदेह के चलते कलेक्शन सेंटर लाया गया है। यहां से सभी की जांच के लिए सैंपल भेजा गया है।
चार सदस्यों को रखा गया है नरसिंहगढ़ में
तब्लीगी जमात के चार सदस्यों को नरसिंहगढ़ में ही क्वारंटाइन किया गया है। सभी पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में हैं। ग्राम प्रधान को भी उनके खाने-पीने का प्रबंध करने के लिए आदेशित किया गया है। जबकि अन्य जमात के सदस्यों को उन्हीं गांव में ही क्वारंटाइन कर दिया गया है। जरूरत समझने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम आगे कदम उठाएगी।
विदेश जाने वालों की हिस्ट्री खंगाल रही पुलिस
जिले के रहने वाले कुछ लोग तब्लीगी जमात में शामिल होकर विदेश यात्रा पर गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार हजरत निजामुद्दीन से ही सभी को तंजियाना जाने की अनुमति मिली थी। जानकारी जुटाने के बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच ने प्रदेश सरकार को मामले से अवगत कराया।
जिसके बाद पुलिस व खुफिया विभाग ऐसे लोगों का ब्यौरा जुटाते रहे। तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों से जानकारी ली जाती रही। परिवार के लोगों से बातचीत करने के बाद उनके दिल्ली से लेकर विदेश जाने के बारे में जानकारी करते रहे। शासन द्वारा विदेश जाने वाले जमात के लोगों की खोजबीन के बाद हड़कंप मचा रहा।
महीनों से जिले में रुके थे बाहरी लोग, खुफिया विभाग को नहीं लगी भनक
जिले में तब्लीगी जमात के 57 सदस्य फरवरी माह से ठिकाना बनाए हुए हैं। महीनों से वह शहर से लेकर गांवों में ठहरे हुए हैं। बाहरी आने-जाने वाले लोगों के साथ ही जिले में होने वाली हर गतिविधियाें पर नजर रखने के लिए एलआईयू, एसआईओ, आईबी पर जिम्मेदारी है। खुफिया विभाग की टीम केवल राजनैतिक धरना प्रदर्शन के साथ ही शासन के आदेशों व निर्देशों का पालन कराने में ही व्यस्त रहती है।
बाहरी लोगों के बारे में जानकारी न होना खुफिया विभाग की बड़ी चूक मानी जा सकती है। फिलहाल मजहबी क्रियाकलाप करने वाली संस्थानों पर नजर रखना खुफिया विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन यहां चूक बरती गई। बाहरी जमात के लोगों को जिले व प्रदेशों में भेजने की जिम्मेदारी दिल्ली निजामुद्दीन से होती रही है
। जिले में पहुंचने पर जमात के साथ जुड़े लोगों की मदद से सभी को उन स्थानों पर पहुंचाया जाता है। जहां उन्हें लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने के लिए मजहबी जानकारी देने की जरूरत होती है।