कोरोना थमने के बाद अब डेंगू-मलेरिया का खतरा पैदा हो गया है। अगस्त-सितंबर के महीन में इन बीमारियों के फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के बाद फिर मौसम बदला है। ऐसे में पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती हैै।
जनपद कोरोना मुक्त हो गया है।
इससे जिले के लोगों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन अब डेेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। पिछले वर्ष आए केसों को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। जिले में संचारी रोग अभियान के तहत घरों के आसपास साफ-सफाई के साथ हर रविवार मच्छर पर वार अभियान स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया है। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में भी डेंगू और मलेरिया की जांच की जा रही थी।
इस वर्ष अभी डेंगू के एक भी केस सामने नहीं आए हैं। करीब पांच सौ लोगों की मलेरिया की जांच कराई गई थी। इनमें 25 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। मलेरिया के मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो गए। मलेरिया और डेंगू से लोगों को बचाव के लिए हर रविवार मच्छर पर वार अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान के तहत प्रत्येक रविवार को पानी टंकी, कूलर, गमले का पानी को जहां बदलने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है वहीं, मलेरिया मच्छर से बचाव के लिए घर के आसपास जमे पानी में जला मोबिल डालने की सलाह दी जा रही है। एसीएमओ डॉ. सीपी शर्मा ने बताया कि डेंगू और मलेरिया से बचाने के लिए फागिंग भी कराई जा रही है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आर्य देशदीपक ने बताया कि डेंगू और मलेरिया के बचाव के लिए घरों के पास पानी न जमा होने दें। रात में मच्छरदानी लगाएं। फुल पैंट और शर्ट पहनें।