संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के साथ यूपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी कर्मचारी संघ के कार्य बहिष्कार से मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। सबसे ज्यादा एचआईवी संक्रमित मरीजों को दिक्कत हो रही है।
शरीर में दवाओं का स्तर कम होने से वायरस और बैक्टीरिया के फिर से सक्रिय होने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं, जिले के 3,120 एचआईवी और 2,865 टीबी रोगियों को डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के काम पर लौटने का इंतजार है। एआरटी सेंटर पर बुधवार से ताला लगा है। जिला क्षय रोग अस्पताल खुला है लेकिन कर्मचारी नहीं थे। इससे टीबी मरीजों को दवाएं नहीं मिलीं।
जांच भी अटकी, ऑपरेशन टले
गर्भवती महिलाओं के साथ प्रसव पीड़िताओं की एचआईवी जांच नहीं हो रही है। वहीं, जांच न होने के कारण मेडिकल कॉलेज में हर दिन पांच से आठ ऑपरेशन टल रहे हैं। चिकित्सक निजी जांच रिपोर्ट मानने को तैयार नहीं हैं।
बोले डॉक्टर
तीन दिन तक दवा न खाने से शरीर में दवाओं का स्तर कम हो जाता है, इससे वायरस और बैक्टीरिया फिर से सक्रिय हो सकते हैं। समय रहते दवा न शुरू करने पर मरीजों की जान को भी खतरा हो सकता है। - डॉ. राकेश त्रिपाठी, एआरटी सेंटर।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में शनिवार से एचआईवी की जांच भी शुरू हो जाएगी। एआरटी सेंटर पर मेडिकल कॉलेज के चीफ फार्मासिस्ट की ड्यूटी लगाकर दवा बांटी जाएगी। - डॉ. मनोज खत्री, नोडल एआरटी सेंटर।