बरसात के चलते शहर की दशा बद से बदतर हो चुकी है। सभी वार्डों में गंदगी के चलते उठने वाली दुर्गंध ने लोगों को बेहाल कर रखा है। वाहनों के आवागमन के दौरान धूल का गुबार लोगों को बीमार बना रहा है। जबकि शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए हर माह नगर पालिका की तिजोरी से 15 से लेकर 18 लाख रुपये तक खर्च होते हैं।
केंद्र व प्रदेश सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को पूरा करने के लिए नगर पालिका से ग्वालियर की संस्था को डोर टू डोर कूड़ा उठाने व सफाई का काम मिला था। सफाई के लिए नगर पालिका को अपना संसाधन देना था। नगर पालिका ने जेसीबी, ट्रैक्टर, छोटी पिकअप समेत अन्य वाहन और सफाईकर्मी भी कंपनी को दे दिए। शुरू में कंपनी ने बेहतर काम किया, लेकिन कुछ दिनों बाद शहर की सफाई व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौटने लगी। मौजूदा समय में शहर के हर वार्ड में गंदगी का अंबार देखने को मिल रहा है। हालात बद से बदतर हो गए हैं। मोहल्लों में डोर टू डोर कंपनी के कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। जिससे शहर को साफ रखने में परेशानी हो रही है। अब दूसरे व तीसरे दिन कूड़ा उठाया जा रहा है। सबसे बुरा हाल सीमावर्ती मोहल्लों में देखने को मिला। सोमवार को जीजीआईसी, स्टेट बैंक, लोनिवि कार्यालय के करीब व हादीहाल के करीब एकत्र कूड़ा नहीं उठाया गया था। यह हाल तो मुख्य मार्ग का था। मोहल्लों के भीतर की दशा बद से बदतर देखने को मिली।
टक्करगंज, विवेक नगर, बलीपुर गायत्री नगर, धर्मशाला वार्ड, सिप्तैन रोड, पठखौली, चिलबिला पश्चिमी, पूर्वी, अस्पताल वार्ड, बेगमवार्ड, दहिलामऊ दक्षिणी, मीराभवन समेत अन्य मोहल्लों में कूड़ा कचरे का अंबार लगा हुआ है। शहर की सफाई बद से बदतर हालात में पहुंचने का कारण आश्चर्यजनक है। हर माह वजन के हिसाब से कूड़ा हटाने व उसे निस्तारित करने वाले स्थान पर भेजने के बदले कंपनी को नगर पालिका 15 से 18 लाख रुपये देती है। इसके बाद भी कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई। कूड़ा उठाने वाले वाहनों की संख्या भी कम हो गई है। इसके कारण शहर स्वच्छ नहीं बन पा रहा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर पालिका ने डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली ग्वालियर की संस्था को अपने सभी संसाधन मुहैया करा दिया। कंपनी के लोगों ने वाहनों की देखभाल नहीं की। जिसके कारण नगर पालिका के 6 छोटे व बड़े वाहन खराब हो गए हैं। शहर के मोहल्लों से उठाए जाने वाले कूड़े का भुगतान हर दिन वजन के हिसाब से होता है। छोटे बड़े वाहनों पर लदे कूड़े का वजन भंगवा चुंगी पर स्थित धर्मकांटे पर कराया जाता है। इसका भुगतान भी नगर पालिका को करना होता है। शहर से हर दिन 35 से 40 टन कूड़ा उठता है।
शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए डोर टू डोर सेवा देने वाली कंपनी की चोरी पकड़ी गई थी। पूर्व में तत्कालीन नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी अवधेश यादव ने गड़बड़ी की आशंका पर औचक जांच कराई। जांच के दौरान वजन के दौरान हेरफेर और कूड़े के स्थान पर लोगों के घरों के सामने से मलबा हटाकर दोहरा लाभ लेने का मामला सामने आया था। इसके बाद कंपनी को नोटिस भी जारी की गई थी।
शहर को साफ सुथरा बनाने व डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए ग्वालियर की कंपनी को काम मिला था। घरों से कूड़ा उठाने के बदले हर मकान से 36 रुपये लेना था। गत दिनों बोर्ड की बैठक में सभासदों ने कंपनी के कार्य पर असंतोष जताते हुए प्रस्ताव पारित किया था कि कंपनी का काम रोक दिया जाए। सभासदों के विरोध के बाद भी नगर पालिका प्रशासन कंपनी से कार्य ले रही है। वहीं ईओ नगर पालिका लालचंद्र भारती का कहना है कि शहर को स्वच्छ बनाने के लिए वह प्रयासरत हैं। जो भी कमियां है उसे दूर की जा रहीं हैं। डंपिंग प्वाइंट से कूड़ा उठाने में विलंब हो रहा है और मोहल्लों से कूड़ा नहीं उठ रहा है। इसकी जानकारी नहीं है।