पुरानी रंजिश, मारपीट और जरा-जरा सी बातों को लेकर होने वाले विवादों में विरोधियों को फंसाने के लिए छेड़खानी और महिला उत्पीड़न का आरोप लगाकर पुलिस से शिकायत की जा रही है। जिले में तीन माह के भीतर पुलिस के पास 213 छेड़खानी व महिला उत्पीड़न के मामले पहुंचे। जांच के बाद इनमें 135 शिकायतें फर्जी पाई गईं।
जनपद के सभी बीस थानों में महिलाओं से संबधित मामलों की सुनवाई के लिए महिला हेल्प डेस्क बनाई गई है। यहां प्रतिदिन पहुंचने वाली दो से तीन शिकायतें महिला उत्पीड़न व छेड़खानी से संबंधित होती हैं। इसके अलावा मारपीट, दुष्कर्म आदि की शिकायतें लेकर भी अब थानों तक महिलाएं व युवतियां पहुंचने लगी हैं। हेल्प डेस्क पर महिला आरक्षियों की ड्यूटी लगाई गई है।
थाने में शिकायत लेकर पहुंचने वाली महिलाओं अथवा युवतियों से हेल्प डेस्क पर तैनात महिला आरक्षी ही बात करती हैं और उनकी समस्याओं को नोट कर उचित कार्रवाई करती हैं मगर, अब इसका विरोधियों को फंसाने के लिए बेजा इस्तेमाल भी किया जा रहा है। विरोधियों को फंसाने के लिए भी छेड़खानी और उत्पीड़न की शिकायतें की जा रही हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।
तीन माह के भीतर जिले के सभी थानों, महिला प्रकोष्ठ, महिला थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में छेड़खानी और महिला उत्पीड़न की करीब 213 शिकायतें दर्ज कराई गईं। पुलिस की जांच के दौरान 135 शिकायतें झूठी मिली हैं। सबसे अधिक सिटी सर्किल के तीन थानों में तीन माह के भीतर 68 मामले पहुंचे। इनमें 44 शिकायतें पुलिस की जांच में झूठी मिलीं। छेड़खानी व महिला उत्पीड़न की जो शिकायतें की गई थीं, वे मारपीट से संबंधित थीं।
सर्किलवार की गई छेड़खानी व उत्पीड़न की शिकायतें
सर्किल शिकायतें जांच के बाद फर्जी मिली शिकायतें
सिटी सर्किल 68 44
कुंडा सर्किल 27 16
लालगंज सर्किल 46 32
रानीगंज सर्किल 38 22
पट्टी सर्किल 34 21
एसपी कार्यालय में भी होती हैं फर्जी शिकायतें
मारपीट, रंजिश जैसे मामलों में विरोधियों को फंसाने के लिए लोग महिलाओं को आगे कर दे रहे हैं। छेड़खानी और उत्पीड़न का आरोप लगाकर पहले थानों में शिकायत की जाती है। अगर थाने की पुलिस फर्जी जांच पर शिकायत नहीं करती है तो मामला एसपी कार्यालय तक पहुंचाया जाता है।
महिला अपराध से संबंधित मामलों में तत्काल सुनवाई कर कार्रवाई का निर्देश थानाध्यक्षों को दिया गया है। थानों पर महिला हेल्प डेस्क पर तैनाम महिला पुलिसकर्मी फरियाद लेकर पहुंचने वाली महिलाओं के प्रार्थना पत्र लेकर कार्रवाई के लिए तुरंत पुलिसकर्मियों को घटनास्थल पर भेजती हैं। ऐसा देखने में आया है कि मामूली मारपीट की घटनाओं में छेड़खानी और उत्पीड़न का आरोप लगाकर शिकायती पत्र दिए जा रहे हैं। जांच कराने पर हकीकत का पता चलता है। सही मामलों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
रोहित मिश्रा, एएसपी पश्चिमी/ नोडल अधिकारी, महिला हेल्प डेस्क