रानीगंज तहसील क्षेत्र में भूमाफियाओं ने अपने रसूख का प्रयोग करते हुए सरकारी जमीनों को रेवड़ी तरह बांट दिया। यहां तक कि अधिकारियों से लेकर लेखपाल व राजस्व निरीक्षकों के फर्जी हस्ताक्षर तक बनाकर सरकारी जमीन का पट्टा कर दिया। लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठे गए। तहसील के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से भूमाफियाओं ने क्षेत्र के दर्जनों गंावों की बेश कीमती जमीनों पर डाका डाला। अब शिकायत अधिकारियों से की गई है।
रानीगंज तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में राजस्व अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत से भूमाफियाओं ने करोड़ों रूपये की सरकारी जमीनों को रेवड़ी की तरह बांट दिया। पुरातन के अध्यक्ष विमल चंद्र तिवारी ने आरोप लगाया है कि संडौरा, बुढ़ौरा, नौड़ेरा, जगदीशपुर, छानापार, बिच्छूर, जरियारी, सरायसिद्वनाथ, दहेरखुर्द, अतरी, सुजहा, दमदम, खाखापुर, जाजापुर, डिघवट, कनेवरा, कलीमुरादपुर, नारायनपुर कला, भीट, सुरवांमिश्रपुर सहित दूसरे गांवों की सरकारी जमीनों पर पहले से ही भूमाफियाओं की नजर थी। ऐसे में भूमाफियाओं ने मन मुताबिक अधिकारियों से सेटिंग होने के बाद बेश कीमती सरकारी जमीनों को 67 क पट्टा, कृषि पट्टा, वृक्षारोपण सहित आबादी में परिवर्तित करा दिया। यहां तक कि ग्राम पंचायतों में गठित भूमि प्रबंधक समिति को इसकी भनक तक नही लगी। पूर्व में तैनात उपजिलाधिकारी महेद्र कुमार के समय में सरकारी जमीनों के लगभग 600 फाइलों में नामजद आबादी दर्ज की गई है। इन जमीनों पर गांव के कुछ लोग ही काबिज हैं। जिन लोगों के नाम से पट्टा व आवादी के रूप में दर्ज किया गया है। जिसमे अधिकांश लोग बाहरी हैं। फाइलों पर हल्का लेखपाल व राजस्व निरीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर भी मिले हैं। जिस पर ग्रामीणों को भी एतराज है। बार एसोशिएसन पुरातन के अध्यक्ष विमल कुमार तिवारी ने सीएम को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को देकर मामले की जांचकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाई की मांग की है। उन्हाेंने यह भी चेताया है कि यदि अवैध रूप से भूमि को हथियाने वाले और अभिलेखों में फर्जी तरीके से नाम दर्ज करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो वे सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।