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नैक से कन्नी काट रहे महाविद्यायल

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नैक मूल्यांकन कराने से जिले के महाविद्यालय कन्नी काट रहे हैं। जिले के 159 कॉलेजों में सिर्फ दो को ही नैक ग्रेड मिला है। राज्य विश्वविद्यालय भी इसको लेकर नाराजगी जता चुका है। यूजीसी ने 2022 तक देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को राष्ट्रीय मूल्यांकन व प्रत्यायन परिषद (नैक) एक्रिडेशन लेना अनिवार्य किया है।
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प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों को बार-बार निर्देश जारी किए गए। इसके बाद भी सीसीएसयू में किसी भी कॉलेजों ने नैक के लिए आवेदन नहीं किया है। जिले में सिर्फ पीबीपीजी और साकेत गर्ल्स पीजी कॉलेज ने ही नैक ग्रेडिंग हासिल की है। सीसीएसयू से संबद्ध एडेड और राजकीय कॉलेजों की संख्या 11 और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की संख्या 148 है।
नए सत्र में जुलाई में प्रस्तावित है नैक मूल्यांकन
नए सत्र में जुलाई में जिले के लगभग दस कॉलेजों में नैक मूल्यांकन प्रस्तावित है। कई कॉलेजों में सितंबर 2020 में नैक मूल्यांकन होना था, लेकिन कोरोना के कारण नहीं हो सका।
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गुणवत्ता देखकर तय होती है ग्रेडिंग
नैक संस्था देशभर के विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों, निजी संस्थानों में गुणवत्ता को परखकर ग्रेड देती है। शिक्षण संस्थान अपने स्तर से तैयारियां पूरी करने के बाद नैक ग्रेडिंग के लिए आवेदन करते हैं। निरीक्षण के दौरान कॉलेजों में शिक्षण सुविधाएं, रिजल्ट आदि जरूरी बातों की जानकारी ली जाती है। इस आधार पर नैक की टीम अपनी रिपोर्ट देती है।
नैक ग्रेडिंग कराना कॉलेजों के लिए जरूरी होता है। इससे कॉलेजों की गुणवत्ता का पता चलता है। जिले के सभी कॉलेजों को नैक ग्रेडिंग कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। कुछ कॉलेजों ने नैक ग्रेडिंग कराने के लिए आवेदन किया है।
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डॉ. अखिलेश सिंह, कुलपति, राज्य विश्वविद्यालय
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