बच्चों को कोचिंग पढ़ाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराने वाले संचालक बाकायदा स्कूल चला रहे हैं। बोर्ड परीक्षा में फार्म भराने से लेकर कापी लिखाने तक का सौदा करने वाले यह कोचिंग संस्थान अभिभावकों की आंखों में धूल झोंक मोटी उगाही कर रहे हैं।
शहर और ग्रामीण इलाकों के कोचिंग संस्थान पढ़े-लिखे अभिभावकों और बच्चों को जहां छल रहे हैं वहीं राजस्व का चूना भी लगा रहे हैं। डीआईओएस कार्यालय में कोचिंग का रजिस्ट्रेशन कराने वाले यह संस्थान हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षार्थियों को नकलची केंद्रों से फार्म भराने, नकल कराने और कापी लिखाने का भी सौदा करते हैं।
कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को अच्छा अंक दिलाने का ठेका लेते हैं। यही नहीं रिजल्ट आने के बाद बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगाकर झूठी शान हासिल करते हैं। परीक्षा फार्म भरने के साथ ही यह कोचिंग संस्थान सक्रिय हो जाते हैं। इनकी पूरी कोशिश होती है कि उनसे जुड़े बच्चों और उनके कोचिंग अर्थात स्कूल के बच्चों का सेंटर गांव में चला जाए ताकि वे अच्छी तरह से नकल कराकर सफलता का सारा श्रेय अपने संस्थान को दे सकें।
इसके लिए वे पैसा भी खर्च करते हैं। चर्चा है कि ऐसे लोगों का संपर्क बोर्ड कार्यालय तक रहता है। ज्यादातर कोचिंग संस्थान नकल से अधिक अंक दिलाकर बच्चों की सफलता का श्रेय वे अपने संस्थान की पढ़ाई को देते हैं। इसके लिए बाकायदे होर्डिंग लगवाते हैं। उनका यह खेल बहुत कम लोग समझ पाते हैं। नकल में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले इन कोचिंग संस्थानों के बारे में जानकारों का कहना है कि परीक्षा कक्ष में बोलकर नकल कराने, हल प्रश्नपत्र की कार्बन कापी पहुंचाने और परीक्षार्थी के स्थान पर दूसरे को बिठाने के लिए यह लोग अलग-अलग रेट निर्धारित करते हैं।
जिले में कोचिंग के नाम पर खेल करने वाले गिने-चुने लोग नहीं हैं बल्कि इनकी संख्या काफी अधिक है। जिला प्रशासन को इस बात की जानकारी है। इसके बाद भी कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जा रहा है।