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छात्रों से लेकर सरकार तक को चूना लगा रहे कोचिंग संस्थान

Sun, 07 Dec 2014 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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प्रतापगढ़। कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले टीचरों की कीमत यूपी बोर्ड परीक्षा आते ही बढ़ जाती है। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के प्रश्नपत्रों को हल करने के लिए साल्वर इन्हीं कोचिंग संस्थानों से बुलाए जाते हैं। नकल माफिया के जाल में उलझे इन अध्यापकों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए मुंहमांगी रकम भी देते हैं।
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यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्रों पर अब साइलेंट नकल का तरीका इजाद हुआ है। यह तरीका विकसित करने वाला कोई और नहीं बल्कि जिले के कोचिंग संचालक हैं। शायद ही जिले का कोई स्कूल ऐसा होगा जहां कंप्यूटर न लगा हो, इसी कंप्यूटर के माध्यम से नकल का खेल होता है। स्कूल में पेपर खुलने से पहले ही स्कैन कर इंटरनेट के माध्यम से कोचिंग संस्थानों को भेज देते हैं। इधर इंतजार में बैठे कोचिंग संस्थान के टीचर प्रश्नपत्र को हल करने के बाद स्कूल कीआईडी पर मेल कर देते हैं। फिर क्या, एक दो नहीं बल्कि उस कोड के स्कूलों को प्रति भेजकर नकल का खुला खेल प्रारंभ हो जाता है। यही वजह है कि अब परीक्षा केंद्रों के बाहर भीड़ नहीं दिखाई देती है। मगर अंदर-अंदर ही यह खेल हो जाता है। बीते वर्ष पूर्व डीआईओएस ने लालगंज स्थित एक कॉलेज में हल प्रश्नपत्र की कार्बन कापी मिलने पर इसका खुलासा किया था। उन्होंने परीक्षा केंद्र को डिबार कर दिया था।

जिले में संचालित अवैध कोचिंग संस्थान नकल माफियाओं से तालमेल बिठाए हैं। मोटी रकम कमाने की ललक रखने वाले यह अध्यापक यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में पेपर हल करने में माहिर होते हैं। इन्हीं के आश्वासन पर वह परीक्षार्थियों के स्थान पर दूसरे को बिठाकर कापी लिखाने, बोलकर लिखाने और हल प्रश्नपत्र की कार्बन कापी पहुंचाने का ठेका लेते हैं। 
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बोर्ड परीक्षा प्रारंभ होते ही प्राय: कोचिंग संस्थानों में ताला लग जाता है। आय का स्रोत नहीं होने के कारण कोचिंग के टीचर नकल माफियाओं के माध्यम से कमाई करते हैं। जिले के कुछ नकलची केंद्र ऐसे हैं जो साल्वरों को अपने कालेज में शिक्षक के रूप में ड्यूटी लगाकर भी पेपर हल करवाते हैं।

 जिले में संचालित अवैध कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अभी तक जिला प्रशासन का डंडा नहीं चला है। यही कारण है कि अवैध कोचिंग संचालकों के हौसले बुलंद हैं। गली-गली में प्रतिदिन कोचिंग संस्थानों की संख्या बढ़ती जा रही है। अगर जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों के खिलाफ जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आने वाले दिनों में बच्चों के लिए समस्या खड़ी हो सकती है।

डीआईओएस शिव कुमार ओझा ने बताया कि अवैध कोचिंग चलाने वाले संचालकों की सूची तैयार करने का कार्य चल रहा है। जल्द ही टीम गठित कर अवैध कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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