शासन ने एक नवंबर से क्रय केंद्रों पर किसानों का धान खरीदने का ऐलान किया था, लेकिन जिले में अभी तक क्रय केंद्र ही नहीं खुल सके हैं। ऐसे में जिले के अफसर शासन के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस बार उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ (यूपीएसएस) से धान खरीद का अधिकार छीन लिया गया है। जिले में प्रत्येक वर्ष किसानों का धान और गेहूं खरीदने वाली इस एजेंसी कार्य संतोषजनक नहीं होेने के कारण शासन ने यह फैसला लिया है। जिले में एक नवंबर से खुलने वाले 50 क्रय केंद्रों पर अभी ताला लटक रहा है। इससे जिन किसानों की धान की फसल तैयार हो गई है, वे बिचौलिए के हाथ बेचने के लिए मजबूर हैं।
किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए इस वर्ष जिले में 50 धान खरीद केंद्र खोलने के लिए स्थल चयनित हुए हैं। मगर अभी तक जिले में एक भी केंद्र नहीं खुले हैं। महुली मंडी में केंद्र खुला भी है,तो अभी एक भी किग्रा की खरीद नहीं हुई है। पीसीएफ के 16 केंद्रों पर अभी बोरे और तराजू ही नहीं पहुंचे हैं। कर्मचारी कल्याण निगम, एग्रो, पीसीएफ ने अभी धान खरीद की दिशा में कोई तैयारी ही नहीं की है। जिले में एक नवंबर से 28 फरवरी तक धान खरीद होनी है। इस वर्ष किसानों का 40हजार मीट्रिकटन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। शासन ने इस बार एक बड़ा फैसला लिया है कि उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ को धान खरीद से वंचित कर दिया है। शासन के इस फैसले के बाद भी खरीद केंद्रों की संख्या में कोई कमी नहीं की गई है, बल्कि इस वर्ष एनसीसीएफ को धान खरीदने की जिम्मेदारी पहली बार दी गई है।