मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए जिला अस्पताल में पुराने भवनों को गिराए जाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बगैर आवास मिले सरकारी आवास खाली करने से इनकार करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी रिट वापस लेने की तैयारी कर ली है। इससे भवनों को गिराए जाने का काम जल्द शुरू हो सकता है।
जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडिकल कालेज बनाए जाने का फैसला होने के बाद अस्पताल के पुराने भवनों को गिराया जाना था। जर्जर भवन को तोड़कर नए बनाए जाने का आदेश भी हो गया। इसके लिए भवनों को चिह्नित करने के बाद सरकारी आवासों में रह रहे कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया। इस पर सरकारी आवास में रहने वाले करीब 22 लोग कोर्ट चले गए। नए आवास मिलने के बाद पुराने आवास को तोड़े जाने की मांग की। मामला हाईकोर्ट में पहुंच जाने के बाद जिला प्रशासन जर्जर भवन को अभी तक तोड़ नहीं सका।
जबकि 2021 तक भवन बनकर तैयार होना था। इस बीच शासन ने कोर्ट जाने वाले कर्मचारियों की सूची मांग ली। तबादले के भय से अब कर्मचारी अब अपनी रिट वापस लेने के लिए तैयार हो गए हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर पीपी पांडेय ने बताया कि कर्मचारियों ने हमें लिखित में कुछ नहीं दिया है।
सभी कर्मचारियों को कोर्ट में लिखकर देना होगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने इतना जरूर कह दिया है कि वे सरकारी आवास को खाली करने को तैयार हैं। यदि कर्मचारी आवास को खाली करते हैं तो एक फरवरी से जर्जर भवन को गिरवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए टेंडर निकाला जाएगा।