जिले में छाती, मधुमेह और टीबी के मरीज बढ़े हैं। थायराइड और गठिया जैसी बीमारियों ने लोगों को जकड़ रखा है। ओपीडी के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है सौ में से करीब साठ मरीज इन बीमारियों से ग्रसित हैं। यह सब खान-पान में परहेज न करने और स्वास्थ्य के प्र्रति जागरूक न रहने का नतीजा है।
1948 में डब्ल्यूएचओ की ओर से 7 अप्रैल का दिन विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में घोषित किया गया। इस दिन को मनाने के लिए जो बातें कहीं गई है वे इसलिए आवश्यक हैं ताकि भविष्य को रोगमुक्त बनाया जा सके। वर्तमान में जिले के रोगियों पर नजर डाली जाए तो चेस्ट, शुगर और टीबी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी अनुपात में थायराइड और गठियां संबंधी रोगों के मरीज भी बढ़े हैं। इसकी प्रमुख वजह प्रदूषित और अनियमित खान-पान है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर मनोज खत्री बताते हैं कि आजकल लोग मेंटल वर्क अधिक कर रहे हैं। फिजिकल वर्क कम हो गया है। आधुनिकता के दौर में लोगों ने अपनी लाइफ स्टाइल बदल ली है। जिसका गहरा प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
बीमारियों से बचने का सबसे बढ़िया तरीका परहेज है। परहेज से तमाम बीमारियों से बचा जा सकता है। बीमारी से ग्रस्त होने के बाद भी परहेज करके रोग को कंट्रोल में रखा जा सकता है। कुछ परहेज तो वैसे भी करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। यूरिक एसिड बढ़ने से लोगों को गठिया रोग हो रहा है। इस तरह के मरीजों को जंक फूड से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा एल्कोहल, बीयर आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। थायराइड के मरीजों को भी इसी तरह का परहेज करना चाहिए। शुगर, टीबी और छाती के मरीजों को खान-पान में परहेज करना चाहिए।