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Pratapgarh News: सीएचसी गजराही...अस्पताल में जेनरेटर नहीं, बत्ती गुल तो एक्सरे मशीन बंद

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80 हजार की आबादी वाले लक्ष्मणपुर ब्लॉक के गजराही में 1992 में सीएचसी का निर्माण कराया गया। 1997 में सीएचसी का उद्घाटन हुआ। इसके बाद भी मरीजों को इलाज के लिए सीएचसी लालगंज या फिर मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। यहां जेनरेटर की व्यवस्था नहीं है। बिजली कटने ही एक्सरे मशीन बंद हो जाती है।
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सीएचसी में अधीक्षक समेत चार डॉक्टर, दो फार्मासिस्ट, दो नर्स और एक वार्ड बॉय व एक वार्ड आया की तैनाती हुई है। डॉक्टरों के लिए आवासीय सुविधा भी है। सीएचसी अधीक्षक आलोक रंजन ने बताया कि औसतन प्रतिदिन दो सौ मरीज ओपीडी में इलाज कराने आते हैं। दो से तीन मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
इलाज को आए मरीजों ने बताया कि बिजली कटने के बाद मरीजों का एक्सरे नहीं हो पाता है। अस्पताल में जेनरेटर नहीं है। सीएचसी का इकलौता हैंडपंप दूषित पानी उगल रहा है। प्रतीक्षालय में पंखा तक नहीं लगाया गया है।
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अस्पताल जाने का नहीं है सही रास्ता
सीएचसी अधीक्षक आलोक रंजन ने बताया कि नौबस्ता से गजराही सीएचसी लिंक मार्ग बदहाल है। लोगों के आवागमन में भी दिक्कतें होती हैं। सड़क मरम्मत के लिए कई बार पत्राचार कर चुका हूं।
चोट लगी है। एक्सरे कराने के लिए मुझे दो घंटे तक बिजली आने का इंतजार करना पड़ा। इस बीच मुझे बाजार से बोतल बंद पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ी। - अमित कुमार, अमरौना


गर्मी के दिनों में इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए पंखा तक का इंतजाम नहीं किया गया है। बिजली कटने के बाद अस्पताल में अंधेरा छा जाता है। एक्सरे जांच में देरी होती है। - शीनू, पीपरताली
वर्जन-
गजराही सीएचसी के पास जेनरेटर नहीं है। जल्द ही मुहैया कराया जाएगा। प्रतीक्षालय में कूलर लगवाने के साथ हैंडपंप मरम्मत के लिए जल निगम को पत्र लिखा जाएगा। - डॉ. एएन प्रसाद, सीएमओ
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