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बड़ा बदमाश पकडना है, बाद में बात करते हैं

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Catch big crooks lets talk later - फोटो : PRATAPGARH
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कानपुर के बिठूर थाना क्षेत्र के मंधना चौकी इंचार्ज अनूप सिंह चौबेपुर थाने क्षेत्र के बिकरू गांव के बदमाश विकास दूबे के घर दबिश देने के लिए गुरुवार शाम से ही तैयारी कर रहे थे। अफसरों के आदेश के बाद वह पूरी तरह से अलर्ट थे। रात 12 बजे उन्होंने आखिरी बार पत्नी नीतू सिंह से फोन पर बात की थी।
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अनूप सिंह की शहादत के बाद प्रयागराज से बच्चों के साथ उनकी पत्नी नीतू सिंह सुबह बेलखरी गांव पहुंचीं। गांव पहुंचने के बाद भी उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनके पति शहीद हो गए हैं। उन्हें बताया गया था कि वह घायल हुए हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। इसकी जानकारी होने के बाद नीतू परेशान हो गईं।
वह बार-बार अनूप को फोन मिलाने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन घरवाले यह कहकर रोक दे रहे थे कि अस्पताल में होने के कारण अभी वह फोन नहीं उठा सकते। थोड़ी देर बाद जब घर पर पुलिस और अफसरों के साथ ही नेताओं और रिश्तेदारों का जमावड़ा होने लगा तो नीतू को इस का एहसास हुआ कि अब उनके पति इस दुनिया में नहीं रहे। इसके बाद वह दहाड़ें मारकर फफकने लगीं। बच्चों भी बिलखने लगे। उनका रुदन देख पुलिस अफसरों की भी आंखें भर आईं। हर कोई गमगीन था।
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नीतू ने फफकते हुए बताया कि गुरुवार रात 12 बजे उन्हें अनूप ने आखिरी बार कॉल की थी। कहा था कि कल चार बदमाश पकड़े थे। अभी फिर दबिश में जाना है। आज बड़ा बदमाश पकड़ना है। फोन रखो, बाद में बात करते हैं। नीतू को क्या पता था कि यह उनके पति की आखिरी कॉल होगी। इस बातचीत के दो से तीन घंटे बाद ही बदमाशों के साथ मुठभेड़ में वह शहीद हो गए। कानपुर में रहने वाले उनके अनूप के चचेरे भाई ने तड़के छह बजे ही फोनकर परिवार में अनूप के शहीद होने की जानकारी दी। इसके बाद परिवार में चीत्कार मच गई।
शुरू से निडर थे अनूप, भाई ने कहा- शहादत पर गर्व
वर्ष 2004 में पुलिस में भर्ती हुए अनूप शुरू से निर्भीक और निडर थे। वह अपना काम पूरी ईमानदारी और मेहनत से करते थे। 2004 में सिपाही बनने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। यही कारण था कि वर्ष 2013-14 में परीक्षा पास कर वह सब इंस्पेक्टर बने। बड़े भाई आलोक सिंह ने बताया कि अनूप निडर थे। पुलिस में जाने के बाद तो उनमें भय नाम की चीज ही नहीं रह गई थी। वह कहते थे बदमाश कुछ नहीं होते। इनसे किसी को नहीं डरना चाहिए। हमें उनकी शहादत पर गर्व है।
साथी की शहादत पर पुलिसकर्मी भी गमगीन
साथी की शहादत पर पुलिसकर्मी भी गमगीन दिखे। घटना की जानकारी होने पर सबसे पहले मानधाता एसओ प्रवीण कुमार कुशवाहा पुलिसकर्मियों के साथ अनूप के घर पहुंचे। इसके बाद रानीगंज सीओ अतुल अंजान त्रिपाठी भी आ गए। थोड़ी देर बाद ही एडिशनल एसपी पूर्वी सुरेंद्र प्रसाद द्विवेदी भी पहुंच गए। बाद में कप्तान अभिषेक भी पहुंचे। प्रशासन के अफसर भी मौजूद थे। अनूप के परिवारवालों का करुण क्रंदन देख पुलिस अफसरों की भी आंखें नम थीं। पत्नी और बच्चों का विलाप देख पुलिस अफसर भी भावुक हो गए। बेटे सूर्यांश को बिलखते देख एएसपी पूर्वी भी अपने आंसू नहीं रोक सके। शाम को इंस्पेक्टर कल्पना गौतम और सब इंस्पेक्टर प्रीति कटियार भी महिला पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचीं और अनूप के घर की महिलाओं को ढांढस बंधाया।
नेताओं का भी लगा रहा जमावड़ा
कानपुर में बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ में सब इंस्पेक्टर अनूप कुमार सिंह के शहीद होने की जानकारी मिलने के बाद उनके घर पर शोक संवेदना जताने वालों का तांता लगा रहा। स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में नेता भी पहुंचे। भाजयुमो काशी क्षेत्र के महामंत्री वरुण प्रताप सिंह ने शहीद के घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया। बसपा नेता विजय मिश्र बॉबी ने भी शोक व्यक्त किया है।
शहीद के परिजनों को मिले दो करोड़ की सहायता व नौकरी
कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता व क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कानपुर में शहीद हुए आठ पुलिस कर्मियों की शहादत को नमन करते हुए गहरी शोक संवेदना प्रकट की है। लालगंज स्थित अपने कैंप कार्यालय में शुक्रवार को उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी घटना में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों के साथ खड़ी है। मोना ने शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी के साथ ही सभी परिवारों को दो-दो करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
उन्होंने घटना में घायल हुए पुलिसकर्मियों को इलाज की बेहतर सुविधा मुहैया कराने की मांग की है। मोना ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ही दिन में कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या, प्रयागराज में परिवार के चार सदस्यों की नृशंस हत्या व गाजियाबाद में पिता व पुत्री की गला रेत कर हत्या से साबित हो गया है कि प्रदेश में जंगलराज है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ कड़े व निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है, जिससे जनता का भरोसा कानून-व्यवस्था पर कायम रह सके।
विधायक मोना ने कोरोना महामारी के बहाने मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। कहा कि देश के लोगों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह देकर जनता का रामभरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की तमाम गैर जिम्मेदाराना नीतियों के चलते कोरोना संक्रमण से देश की जनता बेहाल है। विधायक ने कोरोना महामारी के दौरान निर्वाचन क्षेत्र में अपने खर्च व संसाधन से बचाव के लिए किए गए कार्यों को भी गिनाया।
कानपुर की घटना से अलर्ट पर रही पुलिस
कानपुर में आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद आरोपियों की तलाश में पुलिस अलर्ट पर रही। लालगंज में अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी दिनेश द्विवेदी की अगुवाई में आधा दर्जन थानों की फोर्स ने जगह-जगह सघन चेंकिंग अभियान चलाया। संदिग्धों की पूरी छानबीन के बाद ही उन्हें आगे जाने दिया गया। पुलिस ने लापरवाही पाए जाने पर करीब ढाई दर्जन वाहनों का सीज कर दिया। बिना मॉस्क लगाए सड़कों पर फर्राटा भरने वाले वाहन चालकों से जुर्माना वसूला गया। सड़क पर बड़ी संख्या में पुलिस बल देख लोग सकते में आ गए।

Catch big crooks lets talk later- फोटो : PRATAPGARH

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