फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गम-गुस्से और गर्व के बीच अपने लाल की शहादत पर जार-जार रोया बेल्हा

विज्ञापन
Belha cried out on the martyrdom of his red amidst sorrow and pride - फोटो : PRATAPGARH
विज्ञापन
कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में बदमाशों से हुई मुठभेड़ में प्रतापगढ़ जिले का भी एक लाल शहीद हो गया। बदमाशों की फायरिंग में मानधाता थाना क्षेत्र के बेलखरी गांव के रहने वाले सब इंस्पेक्टर अनूप कुमार सिंह की मौत हो गई। वह कानपुर के बिठूर थाना क्षेत्र की मंधना चौकी के इंचार्ज थे। सुबह तड़के उनकी शहादत की जानकारी होने के बाद गांव में कोहराम मच गया। पत्नी बेसुध हो गई। मासूम बच्चों के साथ पिता, मां और भाइयों की हालत देखकर लोगों की आंखें भर आईं। घटना से लोग स्तब्ध थे। गम-गुस्से के गुबार के बीच लोगों को इस बात का गर्व भी था कि उनका लाल बदमाशों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ है।
विज्ञापन

शहीद सब इंस्पेक्टर अनूप कुमार सिंह मानधाता थाना क्षेत्र के बेलखरी गांव निवासी रिटायर्ड रेलकर्मी रमेश बहादुर सिंह के तीन बेटों में दूसरे नंबर के थे। बड़े भाई आलोक सिंह परिवार के साथ प्रयागराज के हंडिया में रहकर दवाओं का कारोबार करते हैं। छोटा भाई अनुज सिंह गांव में पिता के साथ रहता है। अनूप की पत्नी नीतू सिंह नौ साल की बेटी गौरी और चार साल के बेटे सूर्यांश की पढ़ाई के लिए प्रयागराज में किराए का मकान लेकर रहती हैं।
शुक्रवार सुबह करीब छह बजे कानपुर से अनूप के चचेरे भाई चंद्रकेश सिंह ने परिवार को फोनकर घटना की जानकारी दी। इसके बाद हंडिया में रहने वाले भाई आलोक को बताया गया। वह तुरंत भागकर प्रयागराज पहुंचे और वहां से अनूप की पत्नी और बच्चों को लेकर गांव आए। अनूप के शहीद होने की जानकारी पत्नी और बच्चों को नहीं दी गई थी। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया था कि अनूप मुठभेड़ में घायल हुए हैं और अस्पताल में हैं। थोड़ी ही देर में घर पर पुलिस और नेताओं के पहुंचने का क्रम जारी हो गया। लोग पिता रमेश बहादुर सिंह से मिलकर शोक जताने लगे।
विज्ञापन

इस बीच मानधाता थाने की पुलिस के साथ ही सीओ रानीगंज डा. अतुल अंजान त्रिपाठी भी पहुंच गए। थोड़ी ही देर बाद एएसपी पूर्वी सुरेंद्र द्विवेदी भी पहुंचे। अचानक इतनी भीड़ और पुलिस के जमावड़े को देखकर अनूप की पत्नी नीतू सिंह को यकीन हो गया कि अब वह इस दुनिया में नहीं रहे। वह दहाड़ मारकर रोने लगीं। बच्चे भी बिलखने लगे। रोते-रोते नीतू बेसुध हो जा रही थीं। पिता रमेश बहादुर सिंह और भाइयों का भी बुरा हाल था। आसपास की महिलाएं अनूप की पत्नी को संभालने का प्रयास कर रही थीं।
पुलिस अफसरों ने अनूप के पिता और भाइयों को ढांढस बंधाया। पुलिसकर्मियों समेत पूरे गांव के लोगों की आंखें नम थीं। अनूप की शहादत पर घरवालों और ग्रामीणों में गम था। बदमाशों के प्रति गुस्सा था तो इस बात का गर्व भी था कि उनका लाल अपना फर्ज निभाते हुए अंतिम समय तक बदमाशों का मुकाबला करता रहा।
आखिरी बार फरवरी में एक घंटे के लिए आए थे घर
कानपुर में बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए सब इंस्पेक्टर
अनूप कुमार सिंह आखिरी बार फरवरी में सिर्फ एक घंटे के लिए घर आए थे। मां जड़ावती सिंह की तबियत खराब होने की सूचना पर वह घर पहुंचे और एक घंटे बाद ही अपने साथ लेकर प्रयागराज चले गए। मां को इलाज के लिए पत्नी के पास छोड़कर वह कानपुर चले गए। इसके बाद कोरोना के चलते लॉकडाउन और ड्यूटी के कारण वह घर नहीं आ सके।
नौ साल सिपाही की नौकरी के बाद परीक्षा पास कर बने सब इंस्पेक्टर
बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद सब इंस्पेक्टर अनूप कुमार सिंह ने पुलिस विभाग में करीब नौ साल तक सिपाही के रूप में नौकरी की। वर्ष 2004 में उनका चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर हुआ। वर्ष 2013-14 में वह परीक्षा पास करने के बाद सब इंस्पेक्टर के लिए चुने गए। उनकी प्राथमिक शिक्षा गांव में ही हुई थी। फिर उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी।
रोते हुए चार साल का बेटा बोला, मैं भी जाऊंगा पुलिस में
कानपुर में सब इंस्पेक्टर अनूप कुमार सिंह के शहीद होने की जानकारी होने के बाद उनके गांव बेलखरी स्थित घर पर माहौल बेहद गमगीन था। पुलिसकर्मियों के साथ अफसरों का जमावड़ा लगा था। गांव के लोग और पुलिस प्रशासन के अफसर परिवार को सांत्वना देने में लगे थे। हर किसी की आंखें नम थीं। तभी अनूप का चार साल का बेटा सूर्यांश रोते हुए पहुंचा और अपने चाचा अनुज से कहने लगा कि मैं भी पुलिस में जाऊंगा।
उसे भी इस बात का एहसास हो गया था कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं रहे। उसे रोते देख एडिशनल एसपी सुरेंद्र प्रसाद द्विवेदी ने गले से लगा लिया। अनूप की शादी वर्ष 2008 में सुल्तानपुर के गरयें गांव की नीतू सिंह के साथ हुई थी। उनके दो बच्चे गौरी और सूर्यांश हैं। बेटी गौरी प्रयागराज के सेंट मैरी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती है, जबकि सूर्यांश अभी स्कूल नहीं जाता।

Belha cried out on the martyrdom of his red amidst sorrow and pride- फोटो : PRATAPGARH

Belha cried out on the martyrdom of his red amidst sorrow and pride- फोटो : PRATAPGARH

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें