जिला सेवायोजन कार्यालय पर हुए रोजगार मेले में अभ्यर्थियों को नौकरी मिली, लेकिन कम वेतन से उनके चेहरे पर मायूसी रही। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण मजबूरी में अभ्यर्थी चयन के बाद परदेस जाने के लिए तैयार हुए। पूरे मेले में रोजगार के लिए सिर्फ एक महिला पहुंचीं।
रोजगार मेले में चार कंपनियों ने अभ्यर्थियों के साक्षात्कार लिए। मेले में कंप्यूटर ऑपरेटर, सुपरवाइजर, हेल्पर और पैकर्स पद के लिए कुल 145 अभ्यर्थियों का चयन कर सूची जिला सेवायोजन कार्यालय को दी गई। मेले में 200 से अधिक अभ्यर्थी पहुंचे। चयन की सूचना पर उनके चेहरे पर मुस्कान दिखी, मगर कम वेतन पर परदेस जाने पर सभी मायूस हो गए।
कंप्यूटर ऑपरेटर और सुपरवाइजर जैसे पदों के लिए सिर्फ 10 हजार ही वेतन तय किया गया। सूरत, अहमदाबाद, गुरुग्राम स्थित कंपनियों के लिए अभ्यर्थियों का चयन किया गया। वहीं 200 अभ्यर्थियों की भीड़ में सिर्फ एक महिला अभ्यर्थी कंप्यूटर ऑपरेटर पद के लिए साक्षात्कार देने पहुंचीं। पिछली बार भी एक ही महिला अभ्यर्थी आई थी। सहायक जिला सेवायोजन अधिकारी अनुभव त्रिपाठी ने बताया, अधिकतर नौकरियां प्रदेश के बाहर की होती हैं। ऐसे में कम वेतन पर महिला अभ्यर्थी प्रदेश के बाहर जाने को तैयार नहीं होती हैं। यही कारण है कि रोजगार मेले में अभ्यर्थियों की संख्या घट रही है।
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अभ्यर्थियों से बातचीत
प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बाहर किए जाने के बाद प्राइवेट नौकरी ही सहारा है। बीएड और टीईटी परीक्षा पास करने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। अब प्राइवेट कंपनी के लिए साक्षात्कार दे रहा हूं।
मनोज।
2. सरकार की ओर से मेडिकल क्षेत्र में वैकेंसी नहीं आ रही है। बीएससी, डीफार्मा करने के बाद अब प्राइवेट नौकरी के लिए भी भटकना पड़ रहा है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण नौकरी की जरूरत है।
तत्सत मिश्रा
3. पालिटेक्निक के बाद उम्मीद थी कि जॉब मिल जाएगी। सरकारी नौकरी के साथ प्राइवेट कंपनियों में रोजगार की समस्या है। मजबूरी में कम वेतन पर नौकरी करनी पड़ेगी।
4. एमए और डीसीए की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद से नौकरी की तलाश कर रही हूं। साक्षात्कार देने पर सफल हो जाती हूं, मगर वेतन कम मिलता है। परदेश में रहकर दस हजार की नौकरी करने पर कुछ भी नहीं बचेगा।
मिथिलेश वर्मा