सरकार की ओर से कैंसर रोगियों को ट्रेन यात्रा के दौरान दी जाने वाली किराए में रियायत का दुरुपयोग किया जा रहा है। लोग फर्जी तरीके से एक दिन में दो टिकट बनवा रहे हैं। जो रेल के नियमों के विपरीत है। मंगलवार को प्रतापगढ़ में टिकट बनने के दौरान इसका खुलासा हुआ है। रेलकर्मी ने इसकी रिपोर्ट डिवीजन कार्यालय को भेजी है।
शिवशंकर नाम का यात्री कैंसर रेागी है। इलाज कराने के लिए उसको दिल्ली जाना था। 25 मई को उसने इलाहाबाद से शिवगंगा ट्रेन में आरक्षण करवाया। मगर मुरी एक्सप्रेस हादसा हो जाने से उसने यात्रा रद कर दी। 26 मई मंगलवार को शिवशंकर प्रतापगढ़ आया और दूसरे कंसेशन फार्म पर दिल्ली का आरक्षण करवाया। बातचीत के दौरान शिवशंकर के मुंह से इलाहाबाद से टिकट बनवाने का खुलासा होने पर आरक्षण कर्मी भौचक्के रह गए। उनका चौंकना इस लिहाज से भी स्वाभाविक था कि कैंसर रोगी को कंसेशन के लिए एक समय एक ही बार डॉक्टर प्रमाण पत्र जारी करता है। वह प्रमाण पत्र काउंटर पर जमा हो जाता है।
जबकि शिवशंकर इस सुविधा का लाभ इलाहाबाद में पहले ही ले चुका था। सवाल यह उठता है कि उसके पास प्रतापगढ़ में रियायती दर पर टिकट बनवाने के लिए दूसरा कंसेशन प्रमाण पत्र कहां से आया। अगर थोड़ी देर के लिए यह मान लिया जाए कि शिवशंकर ने दिल्ली से दूसरा कंसेशन प्रमाण पत्र मंगवाया। तो सवाल यह उठता है कि डॉक्टर ने बिना मरीज को देखे दूसरा कंसेशन प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया। अगर उसने ऐसा किया है तो वह भी गलत है। अगर डॉक्टर ने प्रमाण पत्र नहीं जारी किया तो क्या शिवशंकर खुद डॉक्टर बन बैठा और फर्जी प्रमाण पत्र की आड़ में कंसेशन टिकट बनवाने चला आया। ये बातें आरक्षण कर्मी मनोरंजन ने अपने सीनियर को बताई।
मनोरंजन शिवशंकर का टिकट नहीं बना रहे थे। मगर वह झगड़ा करने लगा। डॉक्टर द्वारा जारी किए गये प्रमाण पत्र को चैलेंज करने के लिए मनोरंजन के पास भी कोई ठोस आधार नहीं था। हालांकि उनको सर्टिफिकेट फर्जी लगा। इस पर उन्होंने मामले से वाणिज्य विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया है। सीआरएस राकेश मिश्र का कहना है कि कैंसर रोगी को एक समय में एक ही बार कंसेशन प्रमाण पत्र मिलता है। जो टिकट बनते समय जमा कर लिया जाता है। शिवशंकर ने चौबीस घंटे में दो कंसेशन प्रमापण पत्र कैसे इस्तेमाल किया यह जांच का मामला है।