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एक दिन में गटक रहे 32 लाख की शराब

Wed, 25 May 2016 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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व्‍यापार
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बड़ी-बड़ी आपराधिक घटनाओं को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले प्रतापगढ़ में शराब के कारोबार की जड़ें भी काफी गहरी हैं। यहां पीने-पिलाने वालों की बड़ी जमात है। जानकर हैरानी होगी कि जिले में एक दिन में लोग 32 लाख की शराब पी जा रहे हैं। महीने में दस करोड़ और एक साल के भीतर 124 करोड़ रुपये शराब के ऊपर पानी की तरह बहा दिए जा रहे हैं। घर-परिवार और बच्चों की जरूरतें भले न पूरी हो पा रही हों, लेकिन शौक नवाबी है। शराब से मिलने वाले राजस्व के मामले में जिले का प्रदेश में 21वां स्थान है। पिछले दिनों शराब के दामों में आई कमी के बाद शराब की बिक्री डेढ़ गुना ज्यादा हो गई है।
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 गौर करने वाली बात यह है कि शराब के शौकीनों में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। शराब के सेवन से होने वाले नुकसान और बीमारियों को यहां के लोगों ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। आबकारी विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले के लोगों का मदिरा का रसपान खासा रास आ रहा है। जिले में सबसे ज्यादा 70 प्रतिशत बिक्री देशी शराब की है। प्रतिदिन यहां देशी शराब की पचास हजार शीशियां (पौवा) बिक जाती हैं। दूसरे नंबर पर विदेशी मदिरा है, जिसकी 20 प्रतिशत बिक्री है। प्रतिदिन 1900 फुल बोतल अंग्रेजी शराब जिले में बिक जाती है। दस प्रतिशत बिक्री बियर की होती है। 4500 केन और एक हजार बोतल बियर हर दिन यहां लोग खरीद रहे हैं। जिले की पांच तहसीलों को मिलाकर शराब बेचने के लिए कुल 365 दुकानें आवंटित की गई हैं।

यूं तो शराब के शौकीन पूरे जिले में हैं, लेकिन सदर और पट्टी तहसील में पीने और पिलाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। आबकारी विभाग को सबसे ज्यादा राजस्व सदर तहसील से ही प्राप्त होता है। राजस्व के मामले में पट्टी दूसरे नंबर पर है।ऊपर दिए गए शराब बिक्री के राजस्व के आंकड़े सरकारी हैं। इसके अलावा जिले में बड़े पैमाने पर अरुणाचल और हरियाणा की शराब भी बेचती जाती है। कई इलाको में शराब माफिया शराब बनाकर बेचने में लगे हैं। अगर अवैध शराब की बिक्री का आंकड़ा भी शामिल कर लिया जाए तो प्रतिदिन की शराब की बिक्री पचास लाख से भी ज्यादा हो सकती है। जिले के कई हिस्सों में तस्करी कर लाई गई शराब बड़े पैमाने पर बेची जा रही है।
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जिले भर में देशी, अंग्रेजी और बियर बेचने के लिए कुल 365 दुकानें आवंटित की गई हैं। अकेले शहर में ही शराब की 35 दुकानें और दो मॉडल शाप हैं। देशी की कुल 228, अंग्रेजी की 74 और बियर की 61 दुकानें हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि ज्यादातर शराब की दुकानें रसूखदार लोगों या उनके परिवार और रिश्तेदारों के नाम आंवटित हैं। शराब की दुकान के आंवटन को लेकर भी नामचीन लोगों में होड़ लगी रहती है। शरीर में शराब का सबसे ज्यादा असर लीवर पर होता है। डाक्टरों का कहना है कि लीवर की बीमारियों में चालीस फीसदी मामले अल्कोहल के कारण होते हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डा. पीएस मिश्रा के मुताबिक अधिक सेवन या मिलावटी शराब के पीने से लीवर की सेल डैमेज हो जाती है। जिससे सिरोसिस हो जाती है। लीवर डैमेज होने से शरीर का सारा सिस्टम बिगड़ जाता है। सूजन, हाइपर टेंशन, पीलिया, हृदय और आंत से जुड़ी बीमारियां घेर लेती हैं। गुजरात, बिहार जैसे राज्यों के बाद यूपी में भी शराब पर पूर्णतया बंदी की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन सरकार इसको लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। प्रतापगढ़ जैसे छोटे जिले से सरकार को हर साल शराब की बिक्री से करोड़ों रुपये की आमदनी हो रही है, लेकिन मद्य निषेध यानि शराब से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए आबकारी विभाग को सालभर में सिर्फ एक हजार रुपये का बजट मिलता है। समझा जा सकता है कि इतने कम बजट में विभाग लोगों को किस तरह से जागरूक कर सकेगा।
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