जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की कमी हो गई है। जिससे जरूरतमंद मरीजों के सामने ब्लड का संकट आन पड़ा है। जानकर हैरानी होगी कि जिस बैंक में हमेशा सौ यूनिट के आसपास ब्लड रहता था, मंगलवार को उसमें मात्र आठ यूनिट ब्लड ही बचा था। इमरजेंसी में अगर कोई केस आ जाए तो मरीजों को ब्लड मिलना मुश्किल हो जाएगा। इसको लेकर अस्पताल प्रशासन सक्रिय नहीं हो रहा है।
शायद यह पहला मौका है जब जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड का इस कदर अकाल पड़ा है। 6 सौ यूनिट की क्षमता वाले रक्तकोष में कुछ नहीं तो सौ यूनिट ब्लड रहता ही है। हालांकि 35 दिन बाद रखा हुआ ब्लड खराब हो जाता है। जरूरतमंदों को ब्लड आराम से मिल जाता है। ऐसा रक्तकोष के सूत्रों का मानना है। मगर शायद ऐसा कभी नहीं हुआ कि ब्लड यूनिट की संख्या दहाई से गिरकर इकाई पर आ गई हो। बता दें कि ब्लड बैंक डोनरों और शिविरों के सहारे चलता है। मगर इस बार करीब दो माह से इस तरह का कोई कैंप आयोजित नहीं हुआ। जिसमें रक्तदाता ब्लड दान कर सकें। ऐसा न होने से कोष में ब्लड का संकट आ गया है। वर्तमान में ब्लड बैंक में मात्र आठ यूनिट ब्लड संकट की स्थिति बताने के लिये काफी है। इस बारे में ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ.रमेश यादव का कहना है कि इस समय ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है। केवल आठ यूनिट ब्लड ही शेष मचा है। इमरजेंसी में दिक्कत आ सकती है। इस बारे में सीएमएस को अवगत करा दिया गया है।
एबी और नेगेटिव ब्लड ग्रुप की डिमांड बढ़ी
इस समय एबी और नेगेटिव ब्लड ग्रुप की डिमांड बढ़ी है, जो कि ब्लड बैंक में नहीं हैं। इस ग्रुप के लोग बहुत कम मिलते हैं। ऐसे में इस ग्रुप के मरीजों के सामने संकट आ गया है। उनको ब्लड के लिए दूसरी जगह जाना पड़ रहा है। बैंक में बचे हुए 8 यूनिट ब्लड से मरीजों का भला होेेने वाला नहीं है। एबी और नेगेटिव ग्रुप के जरूरतमंदों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।