बाजार में हर्बल के नाम पर केमिकल रंग बेचे जा रहे हैं। दुकानदारों के इस खेल को लोग समझ नहीं पा रहे हैं। यह रंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। हर्बल रंगों की डिमांड देख कमाई के चक्कर में दुकानदार हर्बल का लेबल लगाकर केमिकल रंग बेच रहे है।
केमिकल कलर के डिब्बे के ऊपर हर्बल का लेबल लगाकर मनमाना दाम वसूला जा रहा है। शहर के बाबागंज, अंबेडकर चौराहा, पंजाबी मार्केट, स्टेशन रोड, घंटाघर सहित प्रमुख बाजारों में फुटकर दुकानों पर यह खेल खूब हो रहा है। इसके अलावा रानीगंज, पट्टी, लालगंज, कुंडा व सदर तहसील क्षेत्र के ग्रामीण बाजारों में भी हर्बल कलर के नाम पर दुकानदार लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. नलिनीश पांडेय ने बताया कि केमिकल रंग से त्वचा में जलन पैदा होती है, घाव हो जाते हैं। जो आगे भी कई भयावह त्वचा की बीमारियों का कारण बनते हैं। इसके इस्तेमाल से बचें, हर्बल रंगों का प्रयोग करें।
हल्का होता है हर्बल रंग, आसानी से होता है साफ
हर्बल रंग केमिकल रंग की तरह नहीं होता है। केमिकल युक्त रंग थोड़ा सा ही इस्तेमाल करने पर चटख हो जाता है। मगर हर्बल रंग में ऐसा नहीं है। यह हल्का होता है। चेहरे पर बहुत कम चढ़ता है। पानी से धुलने पर आसानी से साफ हो जाता है। थोक व्यापारी जावेद ने बताया कि हर्बल कलर ब्राडेंड कंपनियों का ही खरीदना चाहिए। डिब्बा बंद रंग ही लें। खुले रंग लेने में मिलावट का खतरा रहता है।
महंगे हैं हर्बल रंग
केमिकल रंग के मुकाबले हर्बल रंग महंगे हैं। हर्बल अबीर 300 रुपये में एक किग्रा जबकि केमिकल रंग 100 रुपये में ही एक किलोग्राम मिल जाएगा। गुलाल का भी दाम अबीर की तरह ही है। जबकि हर्बल रंग 50 रुपये की एक डिब्बी और केमिकल रंग 10 रुपये में मिल जाएगा।
मुंह में रंग जाने पर गुनगुने पानी से करें गरारा
त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. नलिनीश पांडेय ने बताया कि केमिकल रंगों के इस्तेमाल से बचें। इसका त्वचा पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि रंग खेलते समय यदि कलर मुंह में चला जाए तो लापरवाही न बरतें। तुरंत गुनगुने पानी से गरारा करें। कई बार गरारा करने से रंग का प्रभाव खत्म हो जाता है।