काफी जद्दोजहद के बाद सिपाही अभिषेक की तहरीर पर नगर कोतवाली में 19 घंटे बाद मुकदमा दर्ज किया गया। मगर, कोतवाली पुलिस ने तहरीर में खेल करते हुए आरोपियों को राहत दे दी। करीब पांच बजे मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपियों का शांति भंग में चालान कर दिया। सात बजे दोनों आरोपियों को एसडीएम न्यायालय से जमानत भी मिल गई।
हैरत की बात यह रही कि खाकी पहनकर दूसरों की जान बचाने वाले पुलिसकर्मी अब खुद सहमे नजर आ रहे हैं। विवेचक सीओ सिटी सुबोध गौतम का कहना है कि दर्ज मुकदमे में सात साल से कम सजा है। जिसके चलते दोनों आरोपियों का शांति भंग की आशंका में चालान किया गया।
सत्ता दल के नेता करते रहे पैरवी
दरोगा सिपाही पर हमले के आरोपियों को कोतवाली से छुड़ाने के लिए सत्तादल के नेता लगातार पैरवी करते रहे। यहां तक कि कोतवाली पहुंचे भाजपा नेता कोतवाल से लेकर पुलिस अफसरों से बातचीत करते रहे। जबकि सपाई कोतवाली में नजर नहीं आए। सपा नेत्री के बेटे के खिलाफ लखनऊ पुलिस भी कार्रवाई कर चुकी है।
27 दिनों के भीतर दो बार रौंदा गया खाकी का इकबाल
नगर कोतवाली क्षेत्र में 27 दिन के भीतर खाकी का इकबाल दो बार रौंदा गया। मगर पुलिस ऐसे मनबढ़ लोगों को अभयदान देने से बाज नहीं आ रही। हैरत की बात यह है कि पुलिसकर्मियों से यदि आम व्यक्ति कहासुनी कर ले तो उसे पुलिसकर्मी ऐसी सजा सुनाते हैं, जिससे ऊबरने में उसे वक्त लग जाता है। आम आदमी पर वर्दी का रौब दिखाने वाले पुलिसकर्मी भी अब असहाय नजर आ रहे हैं।
छह अक्तूबर की रात सिपाही हरेंद्र अपने साथी सिपाही सुरजीत के साथ निकला गश्त पर निकला था। इस बीच कार सवार लोगों ने दोनों को रोकते हुए बाइक से खींच लिया। उनके साथ मारपीट की और मोबाइल भी छीनने की कोशिश की। मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस कार समेत आरोपी अभिनव सिंह को दबोच लिया। जबकि उसका साथी कुंवरजी भाग निकला।
काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज जरूर किया, मगर आरोपियों को राहत देने के लिए तहरीर में खेल कर दिया गया। उनका सिफ शांतिभंग में चालान किया गया। जबकि दूसरे आरोपी को पुलिस अब तक नहीं पकड़ सकी है। कोतवाली पुलिस ने यही खेल बृहस्पतिवार की रात हुई घटना में भी किया। सिपाही व दरोगा को पीटने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बजाय उन्हें राहत देने के लिए तहरीर में हमले की कोशिश दिखाया गया। जिसका फायदा खाकी के इकबाल को रौंदने वालों को मिला।