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नैनी जेल में नहीं ली रबड़ी-मलाई, कार्यकर्ताओं संग रात बिताई

Fri, 17 Aug 2018 11:54 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
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राजधानी लखनऊ में संघर्ष समिति के बनैर तले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जारी आंदोलन में प्रदेश के सभी जिले से कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा था। 1975 के इस आंदोलन के समर्थन में उमड़ी भीड़ और अटल के  नारे की गूंज से कांगे्रस सरकार सकते में आ गई। आनन-फानन में फोर्स भेजकर अटलजी सहित करीब दर्जनभर कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर नैनी जेल लाया गया। मतभेद पैदा करने के लिए अटलजी को वीआईपी बैरक में रखा गया, जबकि कार्यकर्ताओं को सामान्य बैरक में छोड़ दिया गया। अटलजी के लिए वीआईपी बैरक में रबड़ी और मलाई खाने के लिए दी गई, लेकिन उन्होंने खाने से इनकार कर दिया और कार्यकर्ताओं के साथ 9 रात बिताई। प्रतापगढ़ के कार्यकर्ताओं को बैरक नंबर दो में अटलजी के साथ बिताए पल आज भी याद हैं।
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सर्वोदय संस्थान के अध्यक्ष पं. ओमप्रकाश पांडेय अनिरुद्ध बताते हैं कि जयप्रकाश ने 1975 में संपूर्णक्रांति की नींव रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य था, देश से कांग्रेस सरकार हटाओ। इसके तहत इसी वर्ष जन संघर्ष समिति बनाई गई। जिसके बनैर तले कांग्रेस के विरोधी देश के सभी छोटे-छोटे दल एकत्र हुए। लखनऊ में सरकार के विरोध में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में आंदोलन का बिगुल बजा। राजधानी में भारी संख्या में अलग-अलग जिलों के लोग एकत्र हुए। प्रतापगढ़ से पं. ओमप्रकाश पांडेय, अशोक पांडेय, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा नेता जवाहर श्रीवास्तव, बलबीर वर्मा, अंबिका सहित आठ लोग शामिल हुए। भारी जनसमर्थन था। अटल के नारों की गूंज से कांग्रेस सरकार ने बौखलाहट में आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी का आदेश दे दिया। ओमप्रकाश पंाडेय बताते हैं कि उस दौरान अटल, राजनारायण सहित सभी आंदेालनकारियों को बसों में ठूंसकर नैनी जेल लाया गया। जहां अटल बिहारी वाजपेयी व राजनारायण को वीआईपी बैरक में रखने की योजना बनाई गई और कार्यकर्ताओं को सामान्य बैरक में भेज दिया गया। वीआईपी बैरक में अटल को थाली में मलाईदार दूध आया तो उन्होंने कार्यकर्ताओं के भोजन के बारे में पूछा। जैसे उन्हें पता चला कार्यकर्ताओं को वहीं भोजन मिलेगा, उन्होंने दूध लेने से इनकार कर दिया, और कहा कि वह बैरक में कार्यकर्ताओं के साथ रहना पंसद करेंगे। अटलजी ने बैरक में कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर 9 रात गुजारी। अपने संयमित जीवन शैली से कार्यकर्ताओं पर अमिट छाप छोड़ी। जेल से निकलते समय उनसे आटोग्राफ लेना चाहा, तो उन्होंने आटोग्राफ के बदले भविष्य की मंगलकामना करते हुए आशीर्वाद दिया। उनके साथ गुजारी गईं नौ रातें आज भी याद हैं।

जब बंदीरक्षक से अटल जी ने मांगीं पुस्तकें
जेल में अटलजी के पास काफी समय रहता था। जेल में एक दिन बीताने के बाद उन्हें पता चला कि यहां लाइब्रेरी है। इस पर उन्होंने बंदीरक्षक को बुलाया। कहा कि भाई लाइब्रे्ररी से कुछ पुस्तकें ला देंगे। बंदीरक्षक  ने हामी भरी। उन्होंने पुर्जी में पुरस्तकों को नाम लिखकर दिए। वह खाली समय में देशप्रेम व वैचारिक पुरस्तकों को खूब पढ़ा करते थे।
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जेल में बंद थे विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित
जन संघर्ष समिति के बैनर तले हुए आंदोलन में अटलजी के साथ मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष हृदयनरायण दीक्षित भी रहे। ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि वह भी अटल जी के साथ नैनी जेल आए थे। नौ दिनों तक वह भी जेल में रहे।
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