बुजुर्गों को अब अपना ब्लड प्रेशर, शुगर जांच कराने के लिए सरकारी या निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं की जांच करने के लिए एएनएम व आशा बहुओं को स्वास्थ्य विभाग यह जिम्मेदारी देने जा रहा है। प्रशिक्षण करवाकर उन्हें जांच मशीन दी जाएगी।
गरीब व असहाय बुजुर्गों को अस्पताल में जांच कराने के दौरान तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। समय से जांच और इलाज न हो पाने के कारण गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की हालत बिगड़ जाती है। इन सब दिक्कतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आशा बहुओं और एनएम को यह जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है।
अभी तक गर्भवती महिलाओं की देखरेख करने, नसबंदी पर जोर देने के साथ किशोरी सुरक्षा योजना को संचालित करने की जिम्मेदारी आशाओं के पास थी। इस जिम्मेदारी को ही आशाएं ठीक ढंग से नहीं निभा पा रही थीं। यही हाल एएनएम का है। ज्यादातर एएनएम सेंटरों से गायब रहती हैं। ऐसे में विभाग का निर्णय कितना कारगर होगा, इसे लेकर अभी से सवाल उठने लगे हैं।